लेबनान के Tayri इलाके में इसराइल द्वारा फॉस्फोरस बमों के इस्तेमाल की खबरें सामने आई हैं। IRNA न्यूज़ एजेंसी ने 11 अप्रैल 2026 को इस घटना की जानकारी दी। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है क्योंकि ये हथियार आम लोगों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं।

फॉस्फोरस बम क्या हैं और इनका इस्तेमाल क्यों विवादित है?

सफेद फॉस्फोरस एक आग लगाने वाला हथियार है। अंतरराष्ट्रीय कानून (Protocol III) के मुताबिक, घनी आबादी वाले इलाकों में इसका इस्तेमाल करना गलत माना जाता है। लेबनान इस नियम का हिस्सा है, लेकिन इसराइल नहीं है। मानवाधिकार संस्थाओं का कहना है कि ऐसे हथियारों से आम नागरिकों को गंभीर चोटें पहुँचती हैं।

मानवाधिकार संस्थाओं और इसराइल का क्या कहना है?

Human Rights Watch (HRW) और Amnesty International ने पहले भी लेबनान के कई इलाकों में इन बमों के इस्तेमाल की पुष्टि की है। HRW के मुताबिक, 3 मार्च 2026 को Yohmor शहर में भी ऐसे हथियारों का इस्तेमाल हुआ था। इसराइल की सेना ने इन दावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है, लेकिन कहा है कि उनके हथियार अंतरराष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से इस्तेमाल किए जाते हैं।

जमीन और लोगों पर इसका क्या असर पड़ा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों की वजह से लेबनान के दक्षिणी इलाकों में 2,000 हेक्टेयर से ज़्यादा जमीन जल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका लोगों को सीमावर्ती इलाकों से हटाने के लिए अपनाया जा रहा है। इससे वहां एक बफर ज़ोन बनाने की कोशिश हो सकती है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.