फिलिस्तीनी कैदियों के साथ इजरायली जेलों में टॉर्चर और यौन हिंसा के गंभीर मामले सामने आए हैं. संयुक्त राष्ट्र (UN) और कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे एक बड़ी साजिश और दमन का तरीका बताया है. हालिया रिपोर्टों में इन घटनाओं को केवल व्यक्तिगत गलती नहीं, बल्कि एक सरकारी नीति के रूप में पेश किया गया है.
मानवाधिकार संगठनों और UN ने क्या आरोप लगाए हैं?
Euro-Mediterranean Human Rights Monitor ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गाजा के कैदियों के साथ बलात्कार और यौन हिंसा एक संगठित सरकारी नीति है. UN की स्पेशल रैपोर्टर Francesca Albanese ने इसे ‘स्टेट डॉक्ट्रिन’ बताया है, जिसका मकसद फिलिस्तीनियों को खत्म करना है. B’Tselem संगठन ने भी अपनी ‘Living Hell’ रिपोर्ट में जेलों के भीतर होने वाले टॉर्चर की गवाही दी है.
रिपोर्ट्स में किन खास प्रताड़नाओं का जिक्र है?
- Francesca Albanese की रिपोर्ट: इसमें हड्डियों और दांतों को तोड़ने, कुत्तों से हमला कराने और भूख से तड़पाने की बात कही गई है.
- Sde Teiman जेल: यहाँ यौन हिंसा के आरोप लगे थे, लेकिन हाल ही में उन 5 सैनिकों पर आरोप हटा लिए गए जिन्होंने बलात्कार किया था.
- Euro-Med Monitor: इन्होंने इस पूरी स्थिति को ‘दीवारों के पीछे का नरसंहार’ करार दिया है.
इजरायल प्रशासन का इस पर क्या कहना है?
इजरायल प्रिज़न सर्विस (IPS) ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि जेलों में कोई व्यवस्थित हिंसा नहीं होती है. IPS के मुताबिक सभी कैदियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत रखा गया है और उन्हें खाना, दवा और मानवीय सुविधाएं दी जा रही हैं.
