अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबर आने के बाद भी इसराइल ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कह दिया है कि वे लेबनान और सीरिया के इलाकों से अपनी सेना नहीं हटाएंगे। यह फैसला उस समय आया है जब दुनिया को उम्मीद थी कि इस डील से युद्ध और तनाव खत्म होगा।

14 जून 2026 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने अमेरिका और ईरान के बीच एक ‘पीस डील’ या समझौते की जानकारी दी थी। इस समझौते के तहत लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए रोकने की बात कही गई है। इस डील पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस डील के पूरा होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की पुष्टि की है।

इस खबर के अगले ही दिन 15 जून को Benjamin Netanyahu ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि इसराइल अपनी सुरक्षा के लिए लेबनान, सीरिया और गाजा के इलाकों में तब तक रहेगा जब तक जरूरत होगी। उन्होंने बताया कि इसराइल ने वहां ‘सुरक्षा क्षेत्र’ (security zones) बनाए हैं और उन्हें बरकरार रखेगा। उन्होंने यह भी माना कि उन्हें इस समझौते की पूरी बारीक जानकारी नहीं है, लेकिन ईरान की कोशिशें नाकाम रहीं कि इसराइल को पीछे हटने के लिए मजबूर किया जाए।

इसराइल के अन्य मंत्रियों ने भी इसी बात पर जोर दिया है। रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा कि सेना लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्रों में अनिश्चित काल के लिए रहेगी ताकि सीमाओं की रक्षा हो सके। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben Gvir ने सीधे शब्दों में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप का यह समझौता इसराइल पर लागू नहीं होता क्योंकि वे इस डील का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि Hezbollah के पूरी तरह खत्म होने से कम कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

दूसरी तरफ, लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने इस डील का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे तनाव कम होगा। Hezbollah ने भी इस समझौते में लेबनान को शामिल करने के लिए ईरान का शुक्रिया अदा किया है। हालांकि, लेबनान में हालात अभी भी गंभीर हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक वहां 3,798 लोग मारे जा चुके हैं और 11,781 लोग घायल हुए हैं, जबकि 11 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने इसराइल को भरोसा दिलाया है कि लेबनान से अपनी सेना हटाना इस समझौते की कोई शर्त नहीं थी। अमेरिका का कहना है कि इसराइल को अपनी रक्षा करने और Hezbollah के हमलों का जवाब देने का पूरा अधिकार है।

Sushma Kumari

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