मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इसराइल ने यूरोपीय देशों की युद्धविराम की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है. अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते के बावजूद इसराइल ने लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने का फैसला किया है. इस फैसले के बाद लेबनान में भीषण बमबारी हुई है जिसमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ है. यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा माना है.

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जंग को लेकर किस देश का क्या है रुख?

इस पूरे मामले में अलग-अलग देशों और संगठनों ने अपनी बात रखी है. इसराइल का कहना है कि उसका अभियान केवल उसकी सुरक्षा के लिए है जबकि ईरान इसे समझौते का उल्लंघन मान रहा है. यहाँ मुख्य पक्षों के बयानों की जानकारी दी गई है:

  • इसराइल: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता लेबनान पर लागू नहीं होता और हिज़्बुल्लाह के खिलाफ हमले जारी रहेंगे.
  • यूरोपीय संघ: यूरोपीय राजनयिक काजा कल्लास और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने इसराइल से हमले रोकने की अपील की है ताकि शांति बनी रहे.
  • अमेरिका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि हिज़्बुल्लाह की मौजूदगी के कारण लेबनान इस युद्धविराम का हिस्सा नहीं है.
  • ईरान: ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान में हमले नहीं रुके तो वह इसराइल को कड़ा और सीधा जवाब देगा.
  • पाकिस्तान: मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा था कि समझौता लेबनान समेत सभी क्षेत्रों के लिए होना चाहिए.

लेबनान में हुए नुकसान का पूरा विवरण

8 और 9 अप्रैल 2026 को लेबनान में हुए हमलों ने भारी तबाही मचाई है. लेबनान सरकार ने इस भीषण नुकसान के बाद देश में राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. हमलों से जुड़ी मुख्य जानकारी नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती है:

विवरण महत्वपूर्ण जानकारी
हमले की तारीख 8 और 9 अप्रैल 2026
मृतकों की संख्या 182 से 254 लोग
घायलों की संख्या 890 से 1,165 के बीच
प्रभावित क्षेत्र दक्षिणी लेबनान और रिहाइशी इलाके
जवाबी कार्रवाई हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इसराइल पर रॉकेट दागे

शांति समझौते पर मंडराता खतरा

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसराइल की सैन्य कार्रवाई की निंदा की है. उनका कहना है कि लेबनान में लगातार हो रही बमबारी से अमेरिका और ईरान के बीच हुआ दो हफ्ते का नाजुक युद्धविराम टूट सकता है. ईरान के संसद अध्यक्ष ने भी साफ़ किया है कि लेबनान इस शांति प्रक्रिया का अभिन्न अंग है और इसे अलग करके नहीं देखा जा सकता. खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है.

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com