अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा शांति समझौता हुआ है जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई फिर से शुरू हो सकती है. लेकिन इस बीच इसराइल ने इस डील को मानने से साफ इनकार कर दिया है. इसराइल का कहना है कि वह अपनी सेना को दक्षिण लेबनान से नहीं हटाएगा और अपनी सुरक्षा के लिए वहां डटा रहेगा.
क्या है अमेरिका और ईरान का समझौता
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 14 जून 2026 की शाम को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौता हो गया है. इस समझौते के तहत ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटा ली गई है और Strait of Hormuz को फिर से खोल दिया गया है. इस डील पर औपचारिक रूप से 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होंगे. ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अब लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान खत्म हो जाएंगे.
इसराइल ने क्यों किया विरोध
इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने 15 जून 2026 को साफ कर दिया कि उनकी सेना दक्षिण लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्रों में अनिश्चित काल तक रहेगी. उन्होंने कहा कि इसराइल अपनी जनता की सुरक्षा के लिए लेबनान से पीछे नहीं हटेगा. इसराइल की योजना Litani River तक एक सुरक्षा क्षेत्र बनाने की है और जब तक उत्तरी इसराइल की सुरक्षा पक्की नहीं हो जाती, तब तक विस्थापित लेबनानी लोगों को वापस नहीं आने दिया जाएगा.
वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben Gvir ने कहा कि Trump का यह समझौता इसराइल पर लागू नहीं होता क्योंकि वे इस डील का हिस्सा नहीं थे. उनका कहना है कि यह समझौता उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति को यह बात साफ कर दी है कि इसराइल अंतरराष्ट्रीय समय सीमा के हिसाब से सेना नहीं हटाएगा.
अन्य देशों और संस्थाओं की प्रतिक्रिया
- यूरोपीय संघ: EU की विदेश नीति प्रमुख Kaja Kallas ने इस समझौते का स्वागत किया और इसे एक बड़ी कामयाबी बताया है.
- पाकिस्तान: प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने 14 जून को अमेरिका और ईरान के बीच इस शांति समझौते की जानकारी दी.
- Human Rights Watch: इस संस्था ने इसराइल के रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर लेबनानी लोगों को वापस न आने देने की बात पर गंभीर चिंता जताई है.
इस तनाव के बीच 14 जून को इसराइल ने बेरूत पर हमला किया था, जिसकी राष्ट्रपति Trump ने आलोचना की और कहा कि यह हमला नहीं होना चाहिए था.