इराक के रेगिस्तान में इसराइल ने चुपके से एक मिलिट्री बेस बनाया था। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बेस का इस्तेमाल ईरान पर हवाई हमलों को आसान बनाने के लिए किया गया। इस खुलासे के बाद इराक सरकार और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है क्योंकि इराक ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।
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इराक में इसराइल का यह गुप्त बेस कब और क्यों बनाया गया?
अमेरिकी मीडिया और Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, इसराइल ने फरवरी 2026 में इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में यह गुप्त बेस बनाया था। इस बेस का मुख्य मकसद ईरान के खिलाफ चलाए गए हवाई अभियान “Operation Roaring Lion/Epic Fury” को सपोर्ट देना था। यहाँ इसराइल के स्पेशल फोर्स और सर्च एंड रेस्क्यू टीमें तैनात थीं, जो इसराइली एयरफोर्स के लिए लॉजिस्टिक्स हब की तरह काम कर रहे थे। यह अभियान 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था।
इराक सरकार और अमेरिका का इस मामले पर क्या कहना है?
इराक की Joint Operations Command ने इन खबरों को गलत और निराधार बताया है। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी के ऑफिस से जुड़े एक अधिकारी ने इसे “अमेरिकी धोखा” कहा और आरोप लगाया कि यह सब अमेरिका की मदद और उसकी कवरिंग में हुआ। दूसरी तरफ, अमेरिका के अधिकारियों ने Wall Street Journal को बताया कि उन्हें इस बेस के बारे में पता था, लेकिन उन्होंने इराक की सेना पर हुए हमलों में अपनी सीधी भूमिका से इनकार किया। अमेरिका ने इराक को सलाह भी दी थी कि सुरक्षा कारणों से नजफ रेगिस्तान के कुछ इलाकों में न जाएं।
इस गुप्त बेस का पता कैसे चला और क्या विवाद हुआ?
इस बेस की खबर तब आई जब मार्च 2026 की शुरुआत में एक स्थानीय चरवाहे ने इलाके में हेलीकॉप्टरों और संदिग्ध मिलिट्री हलचल देखी। 5 मार्च 2026 को इराक की सेना और कुछ “अनजान टुकड़ियों” के बीच झड़प हुई, जिसमें एक इराकी सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई और दो घायल हुए। इसके अलावा, OSINT विश्लेषकों ने सैटेलाइट तस्वीरों में युद्ध से कुछ दिन पहले एक अस्थायी हवाई पट्टी की पहचान की थी। इराक की संसद अब इस मामले की जांच के लिए सैन्य अधिकारियों को बुलाने की तैयारी कर रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Operation Roaring Lion क्या था?
यह ईरान के खिलाफ अमेरिका और इसराइल द्वारा चलाया गया एक हवाई अभियान था, जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था।
क्या इसराइल ने इस दावे की पुष्टि की?
नहीं, Israel Defense Forces (IDF) ने इन रिपोर्ट्स पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
