Qusra Village Siege: इसराइल में फंसा परिवार, नेतन्याहू सरकार पर लगे गंभीर आरोप और नेतन्याहू की नीति पर उठे सवाल

Praggya Singh sabal26 August 20263 min read60 viewsWorld
Qusra Village Siege: इसराइल में फंसा परिवार, नेतन्याहू सरकार पर लगे गंभीर आरोप और नेतन्याहू की नीति पर उठे सवाल

इसराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक के कुसरे गांव में एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां इसराइली सैनिकों ने नेसेट सदस्य ओफेर कासिफ को एक घिरे हुए फिलिस्तीनी परिवार के घर तक जाने से कुछ देर के लिए रोक दिया। यह घटना 26 अगस्त 2026 को हुई, जब वह स्थानीय लोगों की मदद करने और उनका समर्थन दिखाने जा रहे थे। इस गांव में पिछले 17 दिनों से इसराइली सेटलर्स यानी यहूदी बस्तियों के लोगों ने घेराबंदी कर रखी है, जो कि लगभग 9 अगस्त 2026 से शुरू हुई थी। सुरक्षा बलों ने शुरुआती रुकावट के बाद हालांकि बाद में उन्हें अंदर जाने की अनुमति दे दी थी, लेकिन इस पूरी कार्रवाई से वहां के हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

पानी और बिजली की भारी कटौती

कुसरे गांव के रास अल-ऐन इलाके में तीन फिलिस्तीनी परिवार फंसे हुए हैं, जिनमें अबू रिदा और हसन परिवार भी शामिल हैं। इन परिवारों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और वहां पानी तथा बिजली की भारी कटौती की गई है। इसके अलावा उन्हें खाना और दवाइयां तक नहीं मिलने दी जा रही हैं। हालात तब और बिगड़ गए जब सेटलर्स ने घरों के बाहर अपने तंबू गाड़ दिए, रास्तों को बंद कर दिया और लोगों को डराना-धमकाना शुरू कर दिया। इस घटना वाले दिन भी वहां एक नया तंबू लगाया गया था। इसराइल की सेना ने सुरक्षा का हवाला देते हुए इलाके में एक इन्फैंट्री बटालियन को तैनात किया, लेकिन साथ ही पूरे गांव को बंद सैन्य क्षेत्र घोषित कर दिया, जिससे आम लोगों और राजनीतिक नेताओं का वहां पहुंचना मुश्किल हो गया। इससे पहले 14 अगस्त 2026 को भी कासिफ को सेना ने सैन्य पाबंदियों का हवाला देकर अंदर जाने से रोक दिया था।

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है निंदा

नेसेट सदस्य ओफेर कासिफ ने इस पूरी स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई और देश की सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल रंगभेद और कब्जे जैसा बर्ताव है और उन्होंने इसराइली सेना पर सेटलर्स को अवैध चौकियां बनाने की खुली छूट देने का आरोप भी लगाया। इस मामले को लेकर दुनियाभर में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। अमेरिका के इसराइल में राजदूत माइक हकलबी ने इस घेराबंदी को एक भयानक आतंकी कृत्य बताया है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्च कमिश्नर के कार्यालय और फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने भी इस घेराबंदी को आपराधिक और अमानवीय करार दिया है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल का बड़ा बयान

26 अगस्त 2026 को एमनेस्टी इंटरनेशनल यूएसए ने एक बयान जारी कर कहा कि कुसरे गांव की यह घेराबंदी इस बात को दर्शाती है कि राज्य समर्थित इसराइली हिंसा लगातार बढ़ रही है, जिसका मुख्य मकसद फिलिस्तीनियों को उनकी जमीन से बेदखल करना है। संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2026 के दौरान वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों पर सेटलर्स द्वारा 1,430 से ज्यादा हमले किए जा चुके हैं। एक तरफ जहां इसराइली सेना नागरिकों की रक्षा करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सैनिकों को सेटलर्स के साथ गतिविधियों में शामिल देखा गया, जिसके बाद सेना ने भी एक घटना में अपनी खराब सूझबूझ स्वीकार की थी जिसमें सैनिकों ने फिलिस्तीनी परिवारों का सामान उनके घरों से जबरन बाहर निकाल दिया था।

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