Israel News: लेबनान में ईसा मसीह की मूर्ति तोड़ी, इसराइल सेना ने दो जवानों को भेजा जेल, 30 दिन की सजा

लेबनान के एक गांव में ईसा मसीह की मूर्ति तोड़ने वाले इसराइल के दो सैनिकों पर कड़ी कार्रवाई हुई है। इन दोनों जवानों को 30 दिन की जेल की सजा सुनाई गई है और उन्हें कॉम्बैट ड्यूटी से हटा दिया गया है। इस घटना के बाद दुनिया भर में काफी नाराजगी देखी गई, जिसके बाद इसराइल की सेना ने यह कदम उठाया।

मूर्ति तोड़ने की घटना और सैन्य कार्रवाई क्या थी?

दक्षिण लेबनान के Debel गांव में दो इसराइली सैनिकों ने ईसा मसीह की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया। एक जवान ने हथौड़े से मूर्ति तोड़ी और दूसरे ने इस पूरी हरकत का वीडियो बनाया। इसराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने कहा कि यह व्यवहार उनके नियमों और मूल्यों के खिलाफ था। घटना के समय वहां छह अन्य जवान भी मौजूद थे, जिन्होंने इसे रोकने की कोशिश नहीं की, उन्हें अब पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

नेतनयाहू और अंतरराष्ट्रीय नेताओं की क्या प्रतिक्रिया रही?

प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस घटना पर गहरा दुख जताया और इसे बेहद गलत बताया। उन्होंने कहा कि इस हरकत से वह हैरान और दुखी हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, यरूशलेम के लैटिन पैट्रिआर्क और करीब 150 यहूदी नेताओं ने भी इसकी कड़ी निंदा की। अमेरिका के राजदूत Mike Huckabee ने भी दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की थी।

घटना के बाद क्या कदम उठाए गए और आलोचकों ने क्या कहा?

इसराइल की सेना ने स्थानीय समुदाय के साथ तालमेल बिठाकर टूटी हुई मूर्ति को दोबारा बदल दिया है। हालांकि, इस त्वरित कार्रवाई पर अब कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ आलोचकों और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि मूर्ति तोड़ने जैसी हरकत पर तो तुरंत सजा मिल गई, लेकिन आम नागरिकों पर होने वाली बमबारी और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर मामलों में ऐसी तेजी क्यों नहीं दिखती।