दक्षिण लेबनान में इजरायली सैनिकों की हरकतें अब चर्चा का विषय बन गई हैं। सेना के जवान वहां लूटपाट कर रहे हैं और हैरानी की बात यह है कि बड़े कमांडरों की चेतावनी के बाद भी यह सिलसिला नहीं रुक रहा है। इस पूरे मामले ने इजरायली सेना की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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लेबनान में क्या हो रहा है और किसने किया खुलासा?

Al Jazeera English ने 3 मई 2026 को अपनी रिपोर्ट में बताया कि इजरायली सेना अपने जवानों को लूटपाट करने से रोकने में नाकाम रही है। इस मामले में कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं:

  • इजरायली अखबार Haaretz और Euro-Med Human Rights Monitor ने भी सैनिकों और फील्ड कमांडरों के बयानों के आधार पर लूटपाट की पुष्टि की है।
  • खबरों के मुताबिक यह सिलसिला 16 अप्रैल 2026 से ही शुरू हो गया था और अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक लगातार जारी रहा।
  • जिन इलाकों से लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ा, वहां सैनिकों ने संपत्तियों और सामान की चोरी की।

इजरायली चीफ ऑफ स्टाफ ने इस पर क्या कहा?

इस मामले के तूल पकड़ने पर इजरायल के चीफ ऑफ स्टाफ Lt. Gen. Eyal Zamir ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने 27 और 28 अप्रैल 2026 को सार्वजनिक बयान जारी किए:

  • उन्होंने कहा कि लूटपाट की घटना बेहद शर्मनाक है और इससे IDF की पूरी छवि खराब होने का खतरा है।
  • Zamir ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि वह इजरायली सेना को “लुटेरों की फौज” नहीं बनने देंगे।
  • उन्होंने सैनिकों को सोशल मीडिया पर विवादित मैसेज शेयर करने से भी मना किया और इसे एक “रेड लाइन” बताया, जिसे पार करने पर कड़ी सजा मिलेगी।

क्या जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई हुई?

भले ही ऊपर से सख्त आदेश दिए गए, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि असलियत कुछ और थी। कई सीनियर और जूनियर कमांडरों को लूटपाट की खबर थी, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया या बहुत कम कार्रवाई की। बताया गया कि कुछ इलाकों से मिलिट्री पुलिस के चेकपॉइंट्स हटा दिए गए थे, जिससे लूट का सामान ले जाना आसान हो गया। वहीं, लेबनान में 17 अप्रैल से लागू युद्धविराम को 17 मई तक बढ़ाया गया था, लेकिन इस दौरान भी हवाई हमलों और तोड़फोड़ की घटनाएं जारी रहीं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

इजरायली सेना के किस अधिकारी ने लूटपाट की निंदा की?

इजरायल के चीफ ऑफ स्टाफ Lt. Gen. Eyal Zamir ने इस घटना को शर्मनाक बताया और कहा कि वह सेना को लुटेरों की फौज नहीं बनने देंगे।

लूटपाट की खबरें किन संस्थाओं ने सामने लाईं?

यह खबरें मुख्य रूप से Al Jazeera English, इजरायली अखबार Haaretz और Euro-Med Human Rights Monitor द्वारा रिपोर्ट की गईं।