इसराइल ने लेबनान के दक्षिणी इलाकों में बड़े हमले किए हैं जिसमें कम से कम 16 लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए। इस तनाव की वजह से अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत को टाल दिया गया है। दोनों देशों के बीच हाल ही में एक समझौता हुआ था लेकिन जमीनी हालात अब बिगड़ते नज़र आ रहे हैं।

लेबनान में इसराइल की सैन्य कार्रवाई

Israel Defence Forces (IDF) ने शुक्रवार, 19 जून 2026 को दक्षिणी लेबनान के Nabatieh शहर और उसके आसपास के इलाकों जैसे Kfarjouz, Harouf, Sharqiyeh, Doueir, Kfar Reman और Zebdine में हमले किए। IDF ने कहा कि यह कार्रवाई Hezbollah द्वारा ceasefire के नियमों के बार-बार उल्लंघन करने की वजह से की गई।

अमेरिका और ईरान की बातचीत स्थगित

स्विट्जरलैंड में अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच होने वाली तकनीकी बातचीत को स्थगित कर दिया गया है। Swiss Foreign Ministry ने इसकी पुष्टि की है। जानकारी के मुताबिक, लेबनान में इसराइल के हमलों के कारण ईरान ने अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने में देरी की, जिसकी वजह से यह मीटिंग नहीं हो सकी। White House के प्रवक्ता ने बताया कि उपराष्ट्रपति JD Vance भी अभी स्विट्जरलैंड नहीं जाएंगे क्योंकि योजनाएं पूरी तरह फाइनल नहीं हुई थीं।

US-Iran MOU और समझौतों की स्थिति

तनाव के बीच अमेरिका और ईरान ने 17 जून 2026 को एक Memorandum of Understanding (MOU) पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साइन किए। इस समझौते की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगियों के बीच hostilities को खत्म करना।
  • Strait of Hormuz को फिर से खोलना।
  • ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी naval blockade को हटाना, जिसे 18 जून को आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया है।
  • ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों की बातचीत शुरू करना।
  • ईरान द्वारा अपने उच्च समृद्ध यूरेनियम के भंडार को कम करना और अमेरिका द्वारा प्रतिबंध हटाना ताकि ईरान तेल बेच सके।

इसराइल और लेबनान का रुख

इसराइल ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते से बंधा हुआ नहीं है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा कि जब तक सुरक्षा की जरूरत होगी, इसराइली सेना दक्षिणी लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्रों में बनी रहेगी।

दूसरी ओर, लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने 17 जून को कहा कि लेबनान की इसराइल के साथ बातचीत स्वतंत्र है और इसका अमेरिका-ईरान डील से कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना था कि लेबनान की ओर से कोई दूसरा देश बातचीत नहीं कर रहा है।

ईरान का बयान

ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने कहा कि उन्होंने इस MOU को मंजूरी दी क्योंकि उन्हें भरोसा दिलाया गया कि ईरान के अधिकारों और “Resistance Front” की रक्षा की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ सीधी बातचीत का मतलब यह नहीं है कि ईरान वॉशिंगटन के रुख को स्वीकार कर रहा है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com