लेबनान में इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। इसराइल की सेना ने 19 जून 2026 की आधी रात से ही लेबनान में हिजबुल्लाह के 150 से ज़्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। इस बड़े हमले के कारण पूरे इलाके में भारी तबाही हुई है और दोनों तरफ से जान-माल का नुकसान हुआ है।
हमले और जान-माल का नुकसान
इसराइल की सेना ने बताया कि उन्होंने हिजबुल्लाह के कमांड सेंटरों और बुनियादी ढांचे पर हमला किया और दर्जनों लड़ाकों को मार गिराया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इन हवाई हमलों में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई और 39 लोग घायल हुए। वहीं, इसराइल की तरफ से भी नुकसान हुआ है, जिसमें एक बटालियन कमांडर सहित चार सैनिक मारे गए और पांच अन्य घायल हुए।
शांति समझौते पर संकट
यह हमला ऐसे समय में हुआ जब अमेरिकी अधिकारियों ने इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच शुक्रवार शाम 4 बजे से युद्धविराम (Ceasefire) शुरू होने की बात कही थी। इस हिंसा की वजह से अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली तकनीकी बातचीत को भी टाल दिया गया है। ईरान ने साफ कहा है कि जब तक लेबनान पर हमले जारी रहेंगे, वे बातचीत के लिए अपनी टीम नहीं भेजेंगे।
नेताओं के कड़े बयान
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वह हिजबुल्लाह से इसकी बहुत भारी कीमत वसूलेंगे और दक्षिण लेबनान में एक बफर ज़ोन बनाए रखेंगे। इसराइल के कुछ मंत्रियों ने तो यहाँ तक कह दिया कि पूरे लेबनान को जला देना चाहिए। दूसरी ओर, हिजबुल्लाह ने इन आरोपों को नकारा है कि उन्होंने युद्धविराम तोड़ा। हिजबुल्लाह का दावा है कि उनके लड़ाकों ने इसराइल के तीन मर्कावा टैंकों को नष्ट कर दिया है और वे अपनी जमीन की रक्षा जारी रखेंगे।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और स्थिति
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने इस हमले को एक खतरनाक कदम बताया है जिससे शांति की कोशिशें कमजोर हुई हैं। अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने इसराइल का बचाव करते हुए कहा कि जब इसराइल पर हमला होता है, तभी वह जवाब देता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले दोनों पक्षों से युद्धविराम बनाए रखने की अपील की थी ताकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता आगे बढ़ सके। इस लड़ाई के कारण दक्षिण लेबनान के हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा है।