29 मार्च 2026 को इस्राइली वायुसेना (IAF) ने ईरान की राजधानी तेहरान में कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इस कार्रवाई में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल बनाने वाले मुख्य केंद्रों को निशाना बनाया गया है। इस तनाव के बीच सऊदी अरब और कुवैत ने अपनी सीमाओं की ओर आ रहे कई ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया है। क्षेत्र में बिगड़ते हालात को देखते हुए अमेरिका और इस्राइल मिलकर काम कर रहे हैं। इन हमलों से क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है।

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इस्राइल के हमले में किन जगहों को बनाया गया निशाना?

इस्राइली सेना (IDF) ने पुष्टि की है कि रात भर चले ऑपरेशन में तेहरान स्थित हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया। इनमें से एक मुख्य केंद्र ईरान के रक्षा मंत्रालय का था, जहाँ बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए बहुत ही जरूरी पुर्जे तैयार किए जाते थे।

  • तेहरान में मिसाइल असेंबल करने और ड्रोन इंजन बनाने वाली यूनिट पर हमला हुआ।
  • हथियार जमा करने वाले गोदामों और एयर डिफेंस सिस्टम को भी तबाह किया गया।
  • इस्राइली प्रवक्ता के अनुसार, इन ठिकानों का इस्तेमाल इस्राइल पर मिसाइल दागने की तैयारी के लिए हो रहा था।
  • तेहरान में मौजूद अल-अरबी टीवी चैनल के दफ्तर की इमारत पर भी मिसाइल गिरी जिससे वहां काफी नुकसान हुआ है।

सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों पर क्या असर पड़ा?

ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे इस टकराव का सीधा असर पड़ोसी खाड़ी देशों पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान सऊदी अरब और कुवैत ने अपनी हवाई सीमा की सुरक्षा बढ़ा दी है।

तारीख मुख्य घटना
29 मार्च 2026 सऊदी अरब ने 10 ड्रोन मार गिराए, कुवैत ने 4 ड्रोन नष्ट किए।
28 मार्च 2026 ओमान के सलालाह बंदरगाह पर ड्रोन हमला हुआ, एक कर्मचारी घायल।
27 मार्च 2026 रियाद की ओर दागी गई 6 मिसाइलों में से 2 को सऊदी ने बीच में रोका।
22 मार्च 2026 G7 देशों ने ईरान द्वारा नागरिकों और ऊर्जा केंद्रों पर हमलों की निंदा की।

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि उनकी सेना जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। वहीं अमेरिका और इस्राइल मिलकर हूती विद्रोहियों और ईरान की ओर से आने वाले खतरों से निपटने के लिए काम कर रहे हैं। बहरीन और यूएई में भी मिसाइल और ड्रोन गिरने की खबरें मिली हैं।