इसराइल की सेना ने 14 जून 2026 को लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाके में बड़े हमले किए हैं. यह कार्रवाई हिजबुल्लाह के उन ड्रोन हमलों का जवाब है, जो इसराइल के वेस्टर्न गैलिली इलाके में गिरे थे. हमलों के बाद इलाके में काफी दहशत है और स्थानीय लोगों ने ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ें सुनीं.

बेरूत के रिहायशी इलाकों में धमाके

इसराइल के एयर फ़ोर्स ने बेरूत के दक्षिणी उपनगर Dahiyeh इलाके में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर सटीक हमले किए. लेबनानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, Ghobeiri इलाके में एक अपार्टमेंट को निशाना बनाकर दो मिसाइलें दागी गईं. इसके अलावा, दक्षिण लेबनान के Sour जिले के Shihine गांव में इसराइली सैनिकों ने कई घरों को उड़ा दिया.

इसराइली मंत्रियों का सख्त रुख

इस हमले पर इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और रक्षा मंत्री Israel Katz ने एक संयुक्त बयान जारी किया है. उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि इसराइल अपनी ज़मीन पर होने वाले किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा. वहीं, फाइनेंस मिनिस्टर Bezalel Smotrich और नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर Itamar Ben-Gvir ने “Dahiyeh Doctrine” का ज़िक्र किया. Smotrich ने यहाँ तक कहा कि हर एक रॉकेट या ड्रोन हमले के बदले Dahiyeh की 10 इमारतों को तबाह कर देना चाहिए.

हिजबुल्लाह की प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उन्होंने दक्षिण लेबनान के Houla शहर में एक इसराइली पोस्ट पर ड्रोन हमला किया. हिजबुल्लाह के मुताबिक, यह हमला इसराइल द्वारा सीज़फायर के नियमों को तोड़ने और लेबनानी गांवों पर किए गए हमलों का जवाब था. हालांकि, हिजबुल्लाह ने इसराइल के अंदर किए गए ड्रोन हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

सीज़फायर और अमेरिका की भूमिका

बता दें कि अमेरिका की मध्यस्थता में 16 अप्रैल 2026 को एक सीज़फायर लागू हुआ था. इसे कई बार बढ़ाया गया, लेकिन इसराइल और हिजबुल्लाह दोनों ही इस समझौते का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं. फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े समझौते की बात चल रही है, जिसमें लेबनान के हालात को सुधारने का मुद्दा भी शामिल हो सकता है.