West Bank में इसराइल ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। यहाँ हजारों की संख्या में फिलिस्तीनियों के जैतून के पेड़ों को उखाड़ फेंका गया। यह पूरा काम वित्त मंत्री Bezalel Smotrich के आदेश पर हुआ। इस कदम से स्थानीय किसानों की रोजी-रोटी पर बड़ा असर पड़ा है।

इसराइल ने जैतून के पेड़ क्यों उखाड़े?

वित्त मंत्री Bezalel Smotrich ने बताया कि ये पेड़ सरकारी जमीन पर लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि वे इसराइल की जमीन बना रहे हैं और फिलिस्तीनी राज्य के विचार को खत्म कर रहे हैं। इस कार्रवाई का मुख्य मकसद Shakak Industrial Park का विस्तार करना और वहां नई बस्तियां बसाना है। इसराइली अधिकारियों का दावा है कि ये पेड़ ज़ोनिंग मास्टर प्लान के हिसाब से गलत जगह लगाए गए थे।

मानवाधिकार संगठनों और UN की क्या प्रतिक्रिया है?

Yesh Din नाम की मानवाधिकार संस्था ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि जहाँ एक तरफ इसराइल अपनी अवैध बस्तियों को बढ़ावा दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ हजारों फिलिस्तीनियों की कमाई का जरिया खत्म किया जा रहा है। इसी तरह, UN के मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने पहले ही कहा था कि बस्तियों का विस्तार करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक युद्ध अपराध है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

इसराइल ने कितने जैतून के पेड़ उखाड़े हैं?

वित्त मंत्री Bezalel Smotrich के मुताबिक, 7 मई 2026 को उत्तरी वेस्ट बैंक में करीब 3,000 जैतून के पेड़ों को उखाड़ा गया।

इस कार्रवाई के पीछे इसराइल सरकार का क्या तर्क है?

इसराइल सरकार का कहना है कि ये पेड़ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से लगाए गए थे और इस जमीन का उपयोग नई बस्तियों और औद्योगिक पार्क के विस्तार के लिए किया जाएगा।