इसराइल के पूर्व विदेश मंत्री Shlomo Ben-Ami ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ लड़ी गई जंग Tel Aviv और Washington के लिए एक बड़ी रणनीतिक नाकामी साबित हुई. इस पूरे मामले से अरब देशों का अमेरिका पर से भरोसा कम हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल की स्थिति भी कमजोर हुई है.

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इस जंग को रणनीतिक नाकामी क्यों कहा जा रहा है?

Shlomo Ben-Ami ने अपने लेख में बताया कि अमेरिका और इसराइल इस युद्ध में अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाए. उन्होंने कहा कि हाल ही में ईरान के साथ हुई सीजफायर डील ने अमेरिका-इसराइल गठबंधन की रणनीतिक हार पर मुहर लगा दी है. उनके मुताबिक यह एक असिमेट्रिक वॉरफेयर था जहां ताकतवर सेनाएं अपनी जीत को रणनीतिक फायदे में नहीं बदल सकीं.

इस घटना का अरब देशों और इसराइल पर क्या असर हुआ?

इस स्थिति की वजह से अरब देशों का भरोसा अमेरिका में काफी घट गया है. साथ ही अमेरिका के साथ इसराइल के रिश्तों और उसकी साख में भी कमी आई है. Ben-Ami का मानना है कि प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने देश को इस स्थिति में धकेला है, जिससे इसराइल के लोकतंत्र पर भी खतरा मंडरा रहा है.

ईरान की जीत और बाकी चुनौतियां क्या हैं?

Ben-Ami के अनुसार ईरान ने इस जंग में रणनीतिक जीत हासिल की है. हालांकि, कुछ गंभीर मुद्दे अब भी बने हुए हैं जिन्हें केवल बातचीत और कूटनीति से ही सुलझाया जा सकता है:

  • ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताएं अब भी एक चुनौती हैं.
  • यूरेनियम को समृद्ध करने का ईरान का प्रोग्राम जारी है.
  • इन मुद्दों को अब डिप्लोमेसी के जरिए ही हल करना होगा.
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.