इसराइल ने अमेरिका को एक बड़ी खुफिया जानकारी दी है। खबर है कि ईरान डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा था। यह जानकारी इस हफ्ते साझा की गई, जिससे वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव और ज़्यादा बढ़ गया है।
जब व्हाइट हाउस से इस चेतावनी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने ट्रंप के 8 जुलाई वाले बयान का हवाला दिया। ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान की टारगेट लिस्ट में शामिल हैं और अब तक वह किस्मत के सहारे बचे हुए हैं, लेकिन यह किस्मत हमेशा साथ नहीं देती। इस मामले पर इसराइल की वॉशिंगटन एम्बेसी ने कोई कमेंट नहीं किया और ईरान के यूएन मिशन ने भी जवाब नहीं दिया। हालांकि, ईरान के एक अधिकारी ने 9 जुलाई को दावा किया कि उनके पास तुर्की में नाटो समिट के दौरान ट्रंप को मारने का मौका था, लेकिन दोस्ती और अच्छे पड़ोसी संबंधों की वजह से उन्होंने ऐसा नहीं किया।
यह सब तब हो रहा है जब माहौल काफी गर्म है। राष्ट्रपति ट्रंप ने 9 जुलाई को साफ कर दिया कि ईरान के साथ सीजफायर का समझौता अब खत्म हो गया है। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया। अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की संपत्तियों पर हमले किए, वहीं ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन और मिसाइल दागे।
9 जुलाई की रात से अब तक अमेरिकी सेना और उनके सहयोगी देशों ने ईरान की दर्जनों मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोक दिया। उसी रात ट्रंप और इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन पर बात की और इस जंग को लेकर रणनीति बनाई। दूसरी तरफ, 10 जुलाई को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में बड़ी भीड़ जुटी, जहां लोगों ने ट्रंप की मौत के नारे लगाए।
