ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच चल रहे युद्ध के बीच इसराइल सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। West Bank के कब्जे वाले इलाकों में 34 नई अवैध बस्तियां बसाने की मंजूरी दे दी गई है। इस कदम से इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है और वहां रह रहे आम फिलिस्तीनियों का जीना मुश्किल हो गया है।
इसराइल ने क्यों ली नई बस्तियों की मंजूरी?
इसराइल के फाइनेंस मिनिस्टर Bezalel Smotrich ने इन नई बस्तियों की मंजूरी को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। सरकार का मकसद जमीन पर अपना कंट्रोल बढ़ाना है ताकि भविष्य में फिलिस्तीन देश न बन सके। इन फैसलों में नई बस्तियां बसाने के साथ-साथ पुराने अवैध ठिकानों को कानूनी मान्यता देना भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन फैसलों को चुपचाप लागू किया गया ताकि अमेरिका की तरफ से कोई दबाव न आए।
हिंसा और आम लोगों की मुश्किलों का हाल
West Bank में अब आम फिलिस्तीनियों के लिए गाड़ी चलाना या सफर करना बहुत खतरनाक हो गया है। वहां बसने वाले कट्टरपंथी लोगों द्वारा हमलों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे लोगों में डर का माहौल है।
| विवरण | आंकड़े (वर्ष 2026) |
|---|---|
| मार्च में हुए हमले | 200 से ज्यादा |
| मार्च में मौतें | 6 फिलिस्तीनी |
| विस्थापित बच्चे | लगभग 700 |
| कुल घटनाएं (फोर्स और सेटलर्स द्वारा) | लगभग 19,000 |
| कुल मौतें | 34 |
दुनिया भर की संस्थाओं का क्या है रिएक्शन?
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इसराइल के इन कदमों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। UN के मुताबिक, फिलिस्तीनियों के साथ हो रहा यह बर्ताव मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आता है। वहीं, OIC और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी इन बस्तियों को अवैध करार दिया है और इसकी कड़ी निंदा की है। फिलिस्तीन अथॉरिटी (PA) ने इसे एक खतरनाक कदम बताया है।
