दक्षिणी सीरिया में इसराइली सेना का बड़ा कदम, रक्षा मंत्री के दौरे के बाद सीमा पर तनाव बढ़ा

मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और हाल ही में इसराइली सैन्य बलों ने दक्षिणी सीरिया के एक गांव में अपनी घुसपैठ बढ़ा दी है। इस घटनाक्रम से पूरे इलाके में सुरक्षा हालात गंभीर हो गए हैं और सीरियाई सरकार ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसराइली रक्षा मंत्री इस्रायल काट्ज़ के सीरियाई क्षेत्र के दौरे के तुरंत बाद यह सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।
सीमा पर सैन्य गतिविधियां और चेकपॉइंट्स
26 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसराइली सेना ने सीरिया के कुनेइत्रा और दर्रा गवर्नरेट में अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। सीरियन ऑब्जरवेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, इसराइली सैनिक लगभग 10 गाड़ियों के साथ अल-रिफिद के अल-मारिश मोहल्ले में दाखिल हुए। वहां उन्होंने एक नया चेकपॉइंट बनाया और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया। इसके अलावा, सैदा अल-हनौत और मावरिया गांवों में भी सैनिकों ने घर-घर जाकर तलाशी ली और कुछ आम नागरिकों को थोड़े समय के लिए हिरासत में भी रखा। इससे पहले 24 अगस्त को भी मावरिया में सैन्य वाहनों की वापसी देखी गई थी, जो यर्मुक बेसिन में चल रहे अभियानों का हिस्सा था।
सीरिया और कतर की कड़ी प्रतिक्रिया
सीरियाई सरकार ने इसराइली रक्षा मंत्री के इस तरह देश की संप्रभु सीमा के अंदर आने को लेकर कड़ी निंदा की है। सीरियाई अधिकारियों ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और 1974 के डिसइंगेजमेंट समझौते का खुला उल्लंघन बताया है। सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शाइबानी और राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इस बात पर जोर दें कि इसराइली सेना 8 दिसंबर 2024 से पहले वाली स्थिति में वापस लौट जाए। इस मामले में कतर ने भी कड़ा रुख अपनाया और इस यात्रा को संप्रभुता का अवैध उल्लंघन करार दिया। दूसरी ओर, इसराइल का कहना है कि उसका यह सैन्य कदम देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है, क्योंकि वहां जिहादी समूहों और संभावित तुर्की गतिविधियों से खतरा बना हुआ है।
राजनयिक प्रयास और अमेरिका की चिंता
सीमा पर बढ़ते तनाव को कम करने के लिए जॉर्डन में 23 अगस्त 2026 को एक बैठक आयोजित की गई थी। इस अमेरिकी मध्यस्थता वाली बैठक में सीरियाई और इसराइली प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए थे ताकि बातचीत को फिर से पटरी पर लाया जा सके और सुरक्षा समझौते पर बात बन सके। हालांकि इन diplomatic प्रयासों के बावजूद, इस्राइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाली किसी भी स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मौजूदा सैन्य स्थिति वैसी ही बनी रहेगी। इस पूरी स्थिति पर अधिक जानकारी के लिए आप ReliefWeb की रिपोर्ट और इसराइली प्रधानमंत्री कार्यालय का आधिकारिक बयान देख सकते हैं। इसके साथ ही, सीरिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत टॉम बराक ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि इसराइल और तुर्की के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत हो सकती है, इसलिए क्षेत्र में और अधिक तनाव बढ़ाने से बचना चाहिए।