दक्षिणी लेबनान में इसराइली सेना का बड़ा विध्वंस, अरनौौन और कफर तिबनित में कई घरों को किया तबाह.

लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में इसराइली सेना ने बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और विध्वंस की कार्रवाई को अंजाम दिया है। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी एनएनए ने जानकारी दी कि 22 अगस्त 2026 को अरनौौन इलाके के पास भारी तबाही मचाई गई। इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले यानी 21 अगस्त 2026 को भी दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में बड़े स्तर पर तबाही फैलाई गई थी। आम लोग इस भयानक स्थिति से काफी डरे हुए हैं और अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। इस पूरी घटना के बाद से लेबनान के आम नागरिकों की जिंदगी और अधिक मुश्किल हो गई है।
विस्फोटों से थर्राया इलाका
रिपोर्ट्स के मुताबिक नबातीह जिले के अरनौौन और कफर तिबनित गांवों के बीच बहुत शक्तिशाली धमाके किए गए। इसके अलावा कफर तिबनित के अंदर भी भारी तबाही मचाई गई जहां पहले धमाके के दो घंटे के भीतर ही दूसरा बड़ा विध्वंस हुआ। 21 अगस्त के पूरे दिन इसराइली सेना ने लगातार हवाई हमले किए और बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया। ब्रआशेत गांव में एक घर पर बमबारी की गई, बेइत याहून में कई घरों को जला दिया गया और हद्दाथा की तरफ लगातार गोलीबारी की गई। इन हमलों की वजह से आम बस्तियां खंडहर में बदल गई हैं।
इसराइल और लेबनान के नेताओं के बयान
इसराइली रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान में जमीन के नीचे बने रास्तों और रिहायशी घरों को पूरी तरह खत्म कर रही है। उन्होंने इस कार्रवाई के पीछे इसराइल की उत्तरी सीमा को सुरक्षित करने का हवाला दिया। दूसरी तरफ लेबनान के नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इन कामों को सोची-समझी तबाही और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। इसके अलावा लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउस ने इन धमाकों को बहुत खतरनाक बढ़ावा करार दिया जिससे जून के महीने में अमेरिका की देखरेख में हुआ समझौता खतरे में पड़ गया है। लेबनान की सेना ने भी कहा कि इन उल्लंघनों की वजह से उनका उस इलाके में अपनी फौज को भेजना बहुत मुश्किल हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता और समझौतों का भविष्य
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने भी इस पूरी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा कि आम नागरिकों के घरों को इस तरह से बड़े पैमाने पर नष्ट करना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है। वहीं लेबनान के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक ने भी इस बढ़ती तबाही पर अपनी घबराहट जाहिर की है। आपको बता दें कि जून में एक फ्रेमवर्क समझौता हुआ था जिसमें इसराइली सेना का धीरे-धीरे पीछे हटना और हिजबुल्लाह का हथियार डालना शामिल था। लेकिन इसके बावजूद तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हिजबुल्लाह ने सीधी बातचीत और हथियार छोड़ने की शर्त को साफ तौर पर ठुकरा दिया है जिससे समझौते को लागू करना और स्थानीय लोगों का अपने घरों में वापस लौटना अब बहुत मुश्किल नजर आ रहा है।