पूर्वी यरुशलम में इस्राइली बलों का UNRWA ट्रेनिंग सेंटर पर छापा, 40 लोग हिरासत में लिए गए.

पूर्वी यरुशलम में इस्राइली सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी यानी UNRWA के कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर पर अचानक छापा मारा। इस बड़ी घटना के दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों को तुरंत बाहर निकाल दिया गया और लगभग 40 लोगों को हिरासत में ले लिया गया। इस पूरी कार्रवाई की शुरुआत स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 10:00 बजे हुई, जब कम से कम चार बख्तरबंद गाड़ियां और 50 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी उस परिसर के अंदर दाखिल हुए। उस समय वहां करीब 20 कर्मचारी मौजूद थे, जिन्हें भारी सुरक्षा बल के बीच बाहर का रास्ता दिखाया गया। इस दौरान केंद्र के आंगन में इस्राइली झंडा भी फहराया गया और परिसर के कुछ हिस्सों को गिराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई।
इस्राइली मंत्रियों और प्रधानमंत्री का कड़ा रुख
इस पूरी सैन्य कार्रवाई के दौरान इस्राइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-गवीर खुद मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने इस कदम की खुलेआम तारीफ की और ऐलान किया कि इस केंद्र को पूरी तरह खाली करवाया जाएगा क्योंकि उनके मुताबिक इस एजेंसी के लिए यरुशलम और इस्राइली जमीन पर कोई जगह नहीं है। इसके बाद इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस केंद्र को हमेशा के लिए बंद करने का आदेश जारी कर दिया। इस्राइली सरकार का आरोप है कि UNRWA के कुछ कर्मचारी आतंकवाद और पिछले साल 7 अक्टूबर के हमलों में शामिल रहे हैं। इसके अलावा इस्राइली विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह जमीन यहूदी नेशनल फंड की है और यरुशलम नगरपालिका की इस जगह पर एक नया शैक्षणिक परिसर बनाने की योजना पहले से ही तय है। यह सारी कार्रवाई उस कानून के तहत हो रही है जिसे इस्र की संसद यानी नेसेट ने अक्टूबर 2024 में पास किया था, जिसके तहत इस देश के भीतर इस एजेंसी के काम करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने जानकारी दी कि पिछले साल मई के महीने से लेकर अब तक इस्राइली अधिकारियों द्वारा इस केंद्र में बिना अनुमति के घुसने की यह पांचवी घटना है। वहीं दूसरी तरफ UNRWA ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है और याद दिलाया कि यह परिसर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह सुरक्षित है और इसे कूटनीतिक छूट हासिल है। इस बात का असर इस बात से भी पता चलता है कि इस छापे से ठीक एक दिन पहले ही 28 अलग-अलग देशों के राजनयिक मिशनों ने इस जगह का दौरा किया था। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय और अन्य राजनीतिक दलों ने इस छापे को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। इन सभी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की है ताकि इस एजेंसी से जुड़े संस्थानों पर आगे होने वाली ऐसी कार्रवाइयों को तुरंत रोका जा सके।