Occupied East Jerusalem: इजरायली सेना ने की बड़ी कार्रवाई, UNRWA के ट्रेनिंग सेंटर पर किया कब्जा.

इजरायली सेना ने 25 अगस्त 2026 को कब्जा किए गए पूर्वी यरुशलम के काफर अकाब इलाके में स्थित कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर पर अचानक छापा मारा और उस पर अपना कब्जा जमा लिया। यह मुख्य सुविधा संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी यानी UNRWA द्वारा चलाई जाती थी जो फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करती है। सुबह करीब 10:00 बजे स्थानीय समय के अनुसार शुरू हुए इस अभियान में 50 से अधिक सुरक्षाकर्मी और कम से कम चार बख्तरबंद गाड़ियां शामिल थीं। इस दौरान वहां काम कर रहे लगभग 20 UNRWA स्टाफ सदस्यों को जबरन परिसर से बाहर निकाल दिया गया और उन्हें दोबारा वापस न आने की सख्त चेतावनी दी गई। इसके साथ ही आसपास के इलाकों और पास के कलंदिया शरणार्थी शिविर में भारी संख्या में सैनिकों को तैनात कर दिया गया, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
इजरायली मंत्रियों और अधिकारियों का बयान
इस छापेमारी में इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-गवीर ने खुद हिस्सा लिया और इस कार्रवाई को पूरी तरह सही ठहराया। उन्होंने UNRWA पर आरोप लगाया कि इस संस्था के कर्मचारी 7 अक्टूबर के नरसंहार में शामिल थे और यह एजेंसी हमास के लिए एक कवर के रूप में काम करती है। वहीं देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बात की पुष्टि की कि उन्होंने ही इस सेंटर को तोड़ने का आदेश दिया था क्योंकि इजरायल अपनी जमीन पर इस एजेंसी को काम करने की अनुमति नहीं देगा। इजरायली विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि यह जमीन साल 1937 से यहूदी नेशनल फंड के स्वामित्व में है और यरुशलम नगर पालिका ने इस प्रॉपर्टी को एक कम्युनिटी और एजुकेशनल कॉम्प्लेक्स में बदलने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान इजरायली सैनिकों ने सेंटर के प्रांगण में अपना इजरायली झंडा भी फहरा दिया।
UNRWA और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के कमिश्नर-जनरल क्रिश्चियन सॉन्डर्स ने इस छापेमारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक गैर-कानूनी और जबरन प्रवेश बताया। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद चिंताजनक और अस्वीकार्य है। एजेंसी ने इस बात पर जोर दिया कि यह उनका सबसे पुराना वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर है जो हर साल लगभग 16,000 फिलिस्तीनी शरणार्थियों और सैकड़ों छात्रों को शिक्षा और जरूरी सेवाएं प्रदान करता है। UNRWA का कहना है कि यह जगह संयुक्त राष्ट्र के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों से जुड़े सम्मेलन के तहत सुरक्षित है जिस पर इजरायल भी एक हस्ताक्षरकर्ता देश है। हालांकि, इसके विपरीत इजरायली अधिकारियों ने अक्टूबर 2024 में नेसेट द्वारा पारित उस कानून का हवाला दिया जो इस एजेंसी को पूर्वी यरुशलम सहित इजरायली क्षेत्र के भीतर किसी भी तरह के संचालन से रोकता है।
फिलिस्तीनी अधिकारियों का कड़ा रुख
इस जब्ती के बाद फिलिस्तीनी अधिकारियों की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। फिलिस्तीनी प्रेसीडेंसी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तुरंत बैठक बुलाने का अनुरोध किया ताकि इस छापेमारी के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सके। इसके अलावा पीएलओ शरणार्थी मामलों के विभाग ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय समझौतों का खुला उल्लंघन करार दिया। हैरानी की बात यह है कि यह छापेमारी उस घटना के ठीक एक दिन बाद हुई जब 25 से अधिक राजनयिक मिशनों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस सुविधा केंद्र का दौरा किया था। इस टेकओवर के तुरंत बाद इजरायली सैनिकों ने इस क्षेत्र में कई अन्य फिलिस्तीनी संरचनाओं को गिराने की चेतावनी भी जारी कर दी है।