इजरायली सेना ने Qalandiya कैंप में UNRWA ट्रेनिंग सेंटर पर किया कब्जा, स्टाफ को निकाला बाहर.

Aanya26 August 20263 min read83 viewsWorld
इजरायली सेना ने Qalandiya कैंप में UNRWA ट्रेनिंग सेंटर पर किया कब्जा, स्टाफ को निकाला बाहर.

मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ी घटना सामने आई। इजरायली सुरक्षा बलों ने Qalandiya कैंप में स्थित UNRWA के वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर पर अचानक धावा बोलकर उस पर अपना कब्जा जमा लिया। इस सैन्य कार्रवाई में कम से कम चार बख्तरबंद गाड़ियां और 50 से अधिक सुरक्षाकर्मी शामिल थे, जिन्होंने स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 10:00 बजे इस परिसर में प्रवेश किया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद लगभग 20 UNRWA कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया, उनसे पूछताछ की गई और बाद में उन्हें परिसर से बाहर निकाल दिया गया।

कब्जे के बाद उठाया गया बड़ा कदम और छात्रों का भविष्य

परिसर को अपने कब्जे में लेने के तुरंत बाद इजरायली सेना ने वहां अपना झंडा फहरा दिया। इसके साथ ही ऐसी रिपोर्ट्स भी सामने आई हैं कि इस कंपाउंड के कुछ हिस्सों को गिराने यानी डिमोलिशन की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। आपको बता दें कि यह Qalandiya Training Centre साल 1952 में स्थापित किया गया था। इस सेंटर में हर साल कब्जे वाले वेस्ट बैंक से लगभग 340 फिलिस्तीनी युवाओं को वोकेशनल यानी व्यावसायिक शिक्षा दी जाती थी। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के अधिकारियों ने साफ कहा है कि इस जबरन कब्जे से वहां के छात्रों की पढ़ाई का अधिकार तुरंत छिन गया है और आने वाले समय में हजारों अन्य छात्रों का भविष्य भी खतरे में पड़ गया है। मई 2026 के बाद से इजरायली अधिकारियों द्वारा इस सुविधा केंद्र में घुसने की यह पांचवीं अनाधिकृत घटना है। खास बात यह है कि यह कार्रवाई ठीक उसके एक दिन बाद हुई जब 24 अगस्त 2026 को 28 कूटनीतिक मिशनों के प्रतिनिधियों ने इस जगह का दौरा किया था।

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इजरायली सरकार और नेताओं का पक्ष

इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर Itamar Ben Gvir ने इस पूरी कार्रवाई का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने अक्टूबर 2024 में नेसेट द्वारा पारित उस कानून का हवाला दिया जिसके तहत इजरायल के भीतर UNRWA की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि UNRWA के कर्मचारी आतंकवाद में शामिल रहे हैं, जिसमें 7 अक्टूबर का नरसंहार भी शामिल है। इजरायली सरकार का यह भी दावा है कि यह जमीन साल 1937 से यहूदी नेशनल फंड के स्वामित्व में है और इसे एक नए शैक्षणिक और सामुदायिक परिसर के लिए येरुशलम नगर पालिका को आवंटित किया गया था। मंत्री बेन ग्विहर ने इस जब्ती का जश्न मनाते हुए इसे इतिहास रचना बताया और कहा कि UNRWA अब उनके हाथों में आ चुका है।

संयुक्त राष्ट्र और फिलिस्तीन की तीखी प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने इजरायल से तुरंत इस दखलंदाजी को रोकने और परिसर को वापस संयुक्त राष्ट्र को सौंपने की मांग की है। UNRWA और महासचिव के प्रवक्ता Stéphane Dujarric ने इस बात पर जोर दिया कि यूएन चार्टर और विशेषाधिकारों और उन्मुत्तियों के कन्वेंशन के तहत—जिस पर इजरायल भी एक हस्ताक्षरकर्ता है—संयुक्त राष्ट्र की सुविधाएं पूरी तरह से सुरक्षित और अमूल्य हैं। मिडिल ईस्ट पीस प्रोसेस के संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक ad interim Ramiz Alakbarov ने भी इस अनाधिकृत प्रवेश की कड़ी निंदा की है। इसके अलावा, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की है, ताकि यूएन परिसरों के खिलाफ हो रही इन कार्रवाइयों को रोकने के लिए कोई कड़े और बाध्यकारी फैसले लिए जा सकें। यह मौजूदा जब्ती शेख जर्रा में UNRWA कंपाउंड को गिराए जाने और कब्जे वाले पूर्वी येरुशलम में अन्य UNRWA सुविधाओं की बिजली-पानी जैसी जरूरी सेवाओं को बाधित करने जैसी पिछली घटनाओं के बाद सामने आई है।

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