इजरायली सेना ने मानी बड़ी गलती, 5 साल की मासूम हिंड राजब की कार पर की थी गोलीबारी

बुधवार, 19 अगस्त 2026 को इजरायली सैन्य बल ने आधिकारिक रूप से पहली बार इस बात को स्वीकार किया कि उनके सैनिकों ने गाजा में 5 साल की फिलिस्तीनी बच्ची Hind Rajab और उसके परिवार की कार पर गोलीबारी की थी। यह घटना जनवरी 2024 की है, जिसको लेकर सेना पहले लगातार यह कहती रही थी कि उस इलाके में उनके सैनिक मौजूद ही नहीं थे। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद दुनिया भर में एक बार फिर से उस दर्दनाक घटना की चर्चा शुरू हो गई है, जिसने गाजा में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे।
सैनिकों की जांच और एम्बुलेंस पर हमला
सेना की आंतरिक जांच समिति के मुताबिक, जब यह गाड़ी सैनिकों की पोस्ट के पास पहुंची तो वहां मौजूद जवानों ने उस पर फायरिंग कर दी थी। इसके अलावा सेना ने यह भी मान लिया कि जब फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट यानी PRCS की एक एम्बुलेंस उस बच्ची को बचाने के लिए भेजी गई थी, तब उस पर भी एक शेल से हमला किया गया था। इजरायली सेना का यह कहना है कि उन्होंने इस मामले की आपराधिक जांच शुरू कर दी है, क्योंकि एम्बुलेंस के आने-जाने के तालमेल में कुछ कमियां रह गई थीं। इसके साथ ही मार्च 2025 में 15 फिलिस्तीनी डॉक्टरों और राहत कर्मियों की हत्या के मामले में भी अलग से जांच बिठाई गई है। हालांकि, सेना ने यह भी साफ कर दिया कि वर्ल्ड सेंट्रल किचन और डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के राहत कर्मियों पर हुए तीन अन्य हमलों की वे कोई फौजदारी जांच नहीं करेंगे। उनके इस फैसले की वजह से वर्ल्ड सेंट्रल किचन के संस्थापक जोस आंद्रेस समेत कई लोगों ने तीखी नाराजगी जताई है और कड़ा विरोध किया है.
घटना की दर्दनाक सच्चाई और दुनिया भर का गुस्सा
जनवरी 2024 की इस घटना में Hind Rajab और उनके परिवार के छह सदस्य मारे गए थे। यह घटना गाजा में आम लोगों की जान जाने का एक बड़ा वैश्विक प्रतीक बन गई थी। बच्ची की चचेरी बहन Layan Hamada ने उस समय किसी तरह बचकर फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट को फोन किया था और मदद की गुहार लगाई थी। बचाव के लिए भेजे गए दो पैरामेडिक्स Yusuf Zeino और Ahmed al-Madhoun भी तब मारे गए जब उनकी एम्बुलेंस पर हमला हुआ था। बेल्जियम में मौजूद Hind Rajab Foundation ने सेना की इस आंतरिक जांच की साख पर सवाल उठाए हैं और साफ कहा है कि उन्हें इस पर भरोसा नहीं है। उनका यह कहना है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए।
स्वतंत्र जांच की मांग और मानवाधिकार संस्थाओं की प्रतिक्रिया
इस मांग का समर्थन फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट और कई मानवाधिकार संगठन जैसे Yesh Din भी कर रहे हैं। इन संगठनों का कहना है कि इजरायली सेना की अपनी जांच में दोषियों को सजा मिलने का रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है, इसलिए वे इस प्रक्रिया को ज्यादा कारगर नहीं मानते। इस पूरे मामले को न्याय के कटघरे में लाने की मांग को साल 2026 के ऑस्कर के लिए नामांकित और वेनिस ग्रैंड जूरी पुरस्कार जीतने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'The Voice of Hind Rajab' ने और ज्यादा बढ़ा दिया है, जिसमें उस छोटी बच्ची की मदद के लिए की गई फोन कॉल को भी शामिल किया गया है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्च आयुक्त वोल्कर तुर्क ने भी इस मामले में संभावित युद्ध अपराधों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी और यूएन मानवाधिकार परिषद के स्वतंत्र विशेषज्ञों ने भी इस बात को दोहराया था।