West Bank में इसराइल की सेना ने अचानक बड़े हमले शुरू कर दिए हैं. कई इलाकों से लोगों को जबरदस्ती उनके घरों से निकाला गया और मकानों पर कब्जा कर लिया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अब बहुत असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और बड़ी संख्या में बेघर हो रहे हैं.
West Bank में छापेमारी और घरों की तबाही का क्या हाल है?
27 अप्रैल 2026 को इसराइली सेना ने al-Ram, Kafr Aqab और Qalandiya शरणार्थी शिविर में कई रिहायशी और कमर्शियल इमारतों को गिराने के नोटिस दिए. Qalandiya में लगभग 13 परिवारों को जबरन बाहर निकाला गया और उनके घरों को सैन्य चौकियों और पूछताछ केंद्रों में बदल दिया गया. इसके अलावा, Jalud गांव में एक घर को जला दिया गया और Birin में पांच घरों और एक भेड़ बाड़े को गिराने का आदेश दिया गया.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में क्या खुलासे हुए हैं?
संयुक्त राष्ट्र के OCHA ने बताया कि 14 से 20 अप्रैल के बीच फिलिस्तीनियों पर कम से कम 37 हमले हुए. जनवरी 2026 से अब तक करीब 680 हमले हो चुके हैं, जिसका मतलब है कि हर दिन औसतन छह घटनाएं हो रही हैं. इसी अवधि में 40 ढांचे गिराए गए जिनमें 14 घर शामिल थे, जिससे 23 लोग बेघर हो गए. UN विशेषज्ञों ने इन जबरन विस्थापनों पर गहरी चिंता जताई है और इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन माना है.
दोनों पक्षों का इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक बयान है?
- इसराइली सेना: सेना का कहना है कि उनकी छापेमारी का मकसद केवल सशस्त्र समूहों को निशाना बनाना है.
- फिलिस्तीनी प्राधिकरण: उनका कहना है कि यह इसराइल की एक नीति है जिसके जरिए फिलिस्तीनी सामाजिक ढांचे को तोड़ा जा रहा है.
- अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ): 2024 में ICJ ने अपनी राय में कहा था कि फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इसराइल की मौजूदगी गैरकानूनी है.