West Bank Violence: इसराइल के वेस्ट बैंक में भारी हिंसा, बुरका गांव में घरों और फार्म पर हमला.

Nura Basta23 August 20262 min read57 viewsWorld
West Bank Violence: इसराइल के वेस्ट बैंक में भारी हिंसा, बुरका गांव में घरों और फार्म पर हमला.

ओक्यूपाइड वेस्ट बैंक के रामल्लाह के पास बसे बुरका गांव में इसराइली सेटर्स ने फिलिस्तीनी घरों पर धावा बोल दिया। यह घटना 23 अगस्त 2026 को हुई, जहां सेटर्स ने एक टेंट, खेती के उपकरण और स्थानीय किसान के पशुओं का चारा पूरी तरह नष्ट कर दिया। आपको बता दें कि बुरका का पूर्वी एंट्रेंस पिछले साल 7 अक्टूबर 2023 से इसराइली सेना ने बंद कर रखा है, जिससे वहां के लोगों के आने-जाने के लिए केवल पश्चिमी रास्ता ही बचा है। इस इलाके में हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है और आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।

वेस्ट बैंक में रातभर चली कार्रवाई और गिरफ्तारियां

बुरका की यह घटना पूरे वेस्ट बैंक में फैल रही हिंसा का ही एक हिस्सा है। 23 अगस्त 2026 को रातभर चले अभियानों के दौरान इसराइली सेना ने 13 फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था। इसके अलावा, नाबलस के पूर्व में स्थित अस्कोर शरणार्थी शिविर पर एक छापेमारी के दौरान इसराइली बलों ने 14 साल के एक फिलिस्तीनी को गोली मारकर मार डाला। पूरे इलाके में सेटर्स की तरफ से गाड़ियां और घर जलाने, सिंचाई सिस्टम तोड़ने, जैतून और अंगूर के बाग उखाड़ने जैसी कई घटनाएं सामने आई हैं। ये सारी घटनाएं उसरिन, अल-मजरा अल-घर्बिया, खलायल अल-लौज और अल-मिनिया गांव जैसे कई अलग-अलग इलाकों में हुईं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है चिंता

इस बढ़ती हिंसा को लेकर दुनिया भर के बड़े संगठनों और देशों में गहरी चिंता बनी हुई है। 29 जुलाई 2026 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने बस्तियों के विस्तार और इसराइली सुरक्षा बलों व सेटर्स के बीच तालमेल को लेकर कड़ी चिंता जताई थी। इसके बाद 22 अगस्त 2026 को यूरोपीय संघ यानी EU ने भी इस हिंसा की आधिकारिक तौर पर निंदा की। यूरोपीय संघ ने कहा कि यह फिलिस्तीनियों को डराने और उनके घरों से बेदखल करने की एक सोची-समझी कोशिश है। इस बारे में QNA की रिपोर्ट में भी क्षेत्र की खराब स्थिति का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, 21 अगस्त 2026 को आईडीएफ लीडरशिप ने इसराइली नेताओं को चेतावनी दी थी कि वेस्ट बैंक बड़े पैमाने पर हिंसा के मुहाने पर खड़ा है और कुछ सरकारी अधिकारी चरमपंथी सेटर्स की मदद भी कर रहे हैं।

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