दक्षिणी लेबनान पर इसराइल के दो भीषण हमले, सैन्य अभियानों के तेज होने से हालात हुए और गंभीर.

Praggya Singh sabal24 August 20262 min read85 viewsWorld
दक्षिणी लेबनान पर इसराइल के दो भीषण हमले, सैन्य अभियानों के तेज होने से हालात हुए और गंभीर.

लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में इसराइली सेना ने 24 अगस्त 2026 को दो बड़े हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई उस वक्त तेज की गई है जब इलाके में लगातार एयरस्ट्राइक, गोलाबारी और जमीनी सैन्य अभियान तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं। लेबनान में मार्च महीने की शुरुआत से लेकर अब तक तनाव की वजह से 4,300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 12,300 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अलावा देश भर में एक मिलियन यानी दस लाख से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं। इस बारे में अधिक जानकारी आप QNA की आधिकारिक रिपोर्ट में देख सकते हैं।

नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

हालिया हमलों के दौरान इसराइली बलों ने खियाम और हौला के पश्चिमी इलाकों में कई घरों को पूरी तरह तबाह कर दिया और कृषि खेतों में आग लगा दी। इन हमलों का असर मजदूल ज़ौन, हद्दाथा, अली अल-ताहिर, अल-दबशा, अल-मंसूरी, वादी अल-सलौक़ी, ज़ौतार अल-शर्किया, कौनीन, हारिस और नबातिया अल-फवका जैसे कई अन्य क्षेत्रों पर भी साफ तौर पर देखा गया। लेबनान के सुरक्षा अधिकारियों ने इस बात की गहरी चिंता जताई है कि ये हमले रणनीतिक पहाड़ियों के पास एक बफर जोन बनाने की किसी बड़ी सैन्य योजना का हिस्सा हो सकते हैं। हाल ही में 23 अगस्त को देइर अल-ज़हरानी के रहने वाले दो 17 साल के किशोरों, हुसैन शक़रून और अहमद रोमानी की मौत तब हो गई थी जब दौहात कफ़र रम्मान के पास उनकी मोटरसाइकिल पर इसराइली ड्रोन से हमला किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा विरोध और कूटनीतिक चिंताएं

बीते जून 2026 में अमरीका की मध्यस्थता से एक युद्धविराम समझौता हुआ था जिसके तहत हिजबुल्लाह जैसे संगठनों का हथियार डालना और इसराइली सेना की क्रमिक वापसी तय की गई थी। इसके बावजूद मैदानी हालात जस के तस बने हुए हैं और संघर्ष लगातार जारी है। इस बीच वेटिकन की ओर से पोप लियो चौदहवें और लेबनान के राष्ट्रपति जोसफ आउं के बीच 20 अगस्त को हुई बैठक के बाद त्रिपक्षीय समझौते को लागू करने में हो रही देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाब सलाम ने इसराइली हमलों के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने को अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। दूसरी तरफ इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमलों को और तेज करने का संकल्प लिया है, जबकि एक अज्ञात इसराइली सुरक्षा अधिकारी ने क्षेत्र में एक और बटालियन की तैनाती की पुष्टि की है। जवाब में हिजबुल्लाह ने भी इन लगातार हमलों का उचित समय पर कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है।

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