ईरान द्वारा समुद्र में बिछाए गए बमों को हटाने के लिए इटली ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए ‘ऑपरेशन हॉर्मुज़’ के तहत इटली के खास माइनहंटर जहाज तैनात किए गए हैं, जो पानी के नीचे छिपे खतरों को पहचान कर उन्हें खत्म करेंगे। इस मिशन का मकसद समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाना है ताकि व्यापारिक जहाजों को कोई खतरा न रहे।

ताजा जानकारी के मुताबिक, इटली के दो खास माइनहंटर जहाज ITS Crotone और ITS Rimini इस वक्त जिबूती (Djibouti) में तैनात हैं। ये जहाज मई के बीच में ला स्पेज़िया से निकले थे और स्वेज नहर के रास्ते यहाँ पहुँचे हैं। अब ये जहाज हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जाने के आदेश का इंतज़ार कर रहे हैं।

मिशन के लिए क्या हैं शर्तें

इटली की सरकार ने साफ किया है कि ये जहाज तभी आगे बढ़ेंगे जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता या युद्धविराम होगा। इटली के रक्षा मंत्री Guido Crosetto ने बताया कि यह कोई युद्ध मिशन नहीं है और बिना अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे और संसद की मंजूरी के हॉर्मुज़ में प्रवेश नहीं किया जाएगा। विदेश मंत्री Antonio Tajani ने भी इसी बात की पुष्टि की है।

कैसे काम करेंगे ये खास जहाज

इटली के ये जहाज आम जहाजों से अलग हैं और इन्हें खास तौर पर बम खोजने के लिए बनाया गया है। इनकी कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • खास बनावट: ये जहाज स्टील के बजाय रेजिन (GRP) से बने हैं। इससे ये चुंबकीय बमों की पकड़ में नहीं आते और पानी के नीचे कम शोर करते हैं।
  • खोजने का तरीका: इनमें एडवांस सोनार और अंडरवाटर कैमरों का इस्तेमाल होता है। ये पानी की गहराई में छिपे बमों की सही लोकेशन का पता लगाते हैं।
  • बम को नष्ट करना: एक बार जब बम मिल जाता है, तो Pluto Plus और Pluto Gigas जैसे रोबोट (ROVs) का इस्तेमाल किया जाता है। ये रोबोट बम के पास जाकर उसे विस्फोटकों की मदद से नष्ट कर देते हैं।
  • आधुनिक तकनीक: इन जहाजों में HUGIN AUV और REMUS जैसे छोटे स्वायत्त वाहनों का भी उपयोग किया जाता है जो बिना इंसान के पानी के नीचे जा सकते हैं।

कितना बड़ा है खतरा

खबरों के मुताबिक, ईरान ने इस इलाके में करीब 80 समुद्री बम बिछाए हैं, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास 1,000 तक समुद्री बम हो सकते हैं। इस खतरे की वजह से कमर्शियल शिपिंग और इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह रास्ता बहुत जोखिम भरा हो गया है। अमेरिका ने 11 अप्रैल 2026 से अपने डिस्ट्रॉयर और ड्रोन के जरिए सफाई अभियान शुरू कर दिया था।

इटली के अलावा इस मिशन में ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम और नीदरलैंड जैसे देश भी शामिल हैं। जर्मनी ने भी अपने माइन्सवीपर Fulda और सपोर्ट शिप Mosel को जिबूती की तरफ भेजा है। जानकारों का कहना है कि इस पूरे इलाके को साफ करने में कई हफ्ते या महीने लग सकते हैं।