इटली और नैटो के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नैटो चीफ मार्क रुट्टे ने दावा किया था कि ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान अमेरिकी सैन्य विमानों ने इटली की जमीन और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया। अब इटली की सरकार ने इन दावों को गलत बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है।
क्या था नैटो चीफ का दावा
नैटो चीफ मार्क रुट्टे ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ के दौरान इटली में मौजूद अमेरिकी बेस से लगभग 500 अमेरिकी विमान उड़ान भर चुके थे। उन्होंने यह भी बताया कि इस युद्ध के दौरान यूरोपीय बेस से अमेरिकी विमानों ने 4,000 से 5,000 चक्कर लगाए। हालांकि, बाद में नैटो के एक अधिकारी ने साफ किया कि रुट्टे का मतलब केवल पुराने समझौतों के तहत दी गई तकनीकी मदद से था, न कि सीधे युद्ध अभियानों से।
इटली सरकार का पलटवार
इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेट्टो ने रुट्टे की बातों को पूरी तरह भ्रामक बताया। उन्होंने साफ किया कि इटली ने केवल तकनीकी और लॉजिस्टिक कामों की इजाजत दी थी, जिनमें हथियारों का इस्तेमाल नहीं होता। क्रोसेट्टो ने कहा कि जब भी ऐसी मांग की गई जो तय सीमा से बाहर थी, इटली ने उसे मंजूरी नहीं दी।
इटली के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि देश ने हमेशा अपने संविधान, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संसदीय नियमों का पालन किया है। वहीं, विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने इस पूरे विवाद को मामूली बात बताया और कहा कि रुट्टे की बातों का गलत मतलब निकाला गया है।
नियम और पुरानी शर्तें
इटली और अमेरिका के बीच 1950 के दशक के पुराने समझौते हैं। इनके तहत अमेरिकी नौसेना के बेस का इस्तेमाल ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक कामों के लिए किया जा सकता है। लेकिन अगर किसी विमान में हथियार हों और उसे युद्ध के लिए इस्तेमाल करना हो, तो इसके लिए इटली की संसद की मंजूरी जरूरी होती है।
- मार्च 2026 में इटली ने सिकोनेला एयरबेस का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था क्योंकि अमेरिका ने जरूरी मंजूरी नहीं ली थी।
- इटली में अमेरिका की लगभग 120 सैन्य सुविधाएं हैं, जिनमें सिकोनेला और अवियानो एयर बेस शामिल हैं।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ईरान मुद्दे पर तनाव था। मेलोनी ने साफ कहा है कि इटली एक संप्रभु देश है और उसकी जमीन का इस्तेमाल तय समझौतों के हिसाब से ही होगा।
