इटली ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनेगा। प्रधानमंत्री Giorgia Meloni और रक्षा मंत्री Guido Crosetto ने कहा कि उनका लक्ष्य तनाव को कम करना और बातचीत के जरिए मामला सुलझाना है। इटली अपनी सेना और अपने हितों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रख रहा है।

👉: Iran में धमाकों से मची तबाही, Strait of Hormuz बंद, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा

इटली सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि उसने अपनी जमीन या सैन्य अड्डों (military bases) का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए नहीं करने दिया है। अमेरिका के साथ जो पुराने डिफेंस समझौते हैं, उनका पालन किया जा रहा है, लेकिन ये केवल रसद और गैर-युद्ध कार्यों तक ही सीमित हैं। सरकार ने कहा कि अगर इटली के बेस से किसी हमले की मांग की जाती है, तो इसके लिए संसद की मंजूरी लेना जरूरी होगा।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है। नाटो (NATO) के महासचिव Mark Rutte ने अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों का बचाव किया था और कहा था कि जो सदस्य देश बेस देते हैं, उनकी भी जिम्मेदारी होती है। इस बात पर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने नाटो की कड़ी आलोचना की।

तनाव के बीच अब शांति की उम्मीद जगी है। खबरों के मुताबिक, ईरान और अमेरिका जल्द ही Oman में फिर से बातचीत शुरू करेंगे ताकि दोनों देशों के बीच तनाव को कम किया जा सके।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.