इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने साफ़ कर दिया है कि उनका देश ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान में शामिल नहीं होगा। 8 जुलाई 2026 को उन्होंने इस बात को दोबारा दोहराया और कहा कि रोम का यह फैसला अटल है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय इटली के राष्ट्रीय हित और पश्चिमी देशों की एकता को बनाए रखने के लिए लिया गया है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव बहुत ज़्यादा बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है और Giorgia Meloni की आलोचना की है। ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया कि इस बात से उनके और मेलोनी के रिश्तों में थोड़ी खटास आई है। वहीं दूसरी ओर, NATO के महासचिव Mark Rutte ने ईरान पर अमेरिका के हमलों को बिल्कुल ज़रूरी बताया है।
क्षेत्र में हालात काफी खराब हो चुके हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिकी सेना की मदद करेगा, उसे ईरान अपना निशाना बनाएगा। इससे पहले 7 जुलाई को अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन पर कम से कम 20 बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे थे।
इटली अपनी इस पुरानी नीति पर कायम है। जून 2026 के अंत में इटली के विदेश मंत्री Antonio Tajani और रक्षा मंत्री Guido Crosetto ने उन दावों को गलत बताया था कि अमेरिकी विमानों ने ईरान पर हमले के लिए इटली के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल किया। उन्होंने साफ़ किया था कि इटली ने सिर्फ तकनीकी और लॉजिस्टिक मदद की इजाजत दी थी, न कि युद्ध जैसी गतिविधियों की।
ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi और प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर इटली ने अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए अपने अड्डों का इस्तेमाल करने दिया, तो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसे ईरान पर हमला माना जाएगा।
