इटली और इसराइल के बीच करीब 20 साल पुराना रक्षा समझौता अब खत्म होने जा रहा है। इटली सरकार ने इस समझौते को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। यह कदम इसराइली सेना द्वारा लेबनान में तैनात इटली के शांति सैनिकों पर चेतावनी के तौर पर गोली चलाने के बाद उठाया गया है। प्रधानमंत्री जर्जिया मेलोनी ने इसे बिल्कुल गलत बताया है।
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इटली ने यह बड़ा फैसला क्यों लिया?
लेबनान के दक्षिणी हिस्से में 8 या 9 अप्रैल को इसराइली सेना ने इटली के शांति सैनिकों के काफिले पर चेतावनी की गोलियां चलाई थीं। इस घटना के बाद इटली ने रोम में इसराइल के राजदूत को तलब किया था। प्रधानमंत्री जर्जिया मेलोनी ने 14 अप्रैल को ऐलान किया कि सरकार इस रक्षा समझौते को रिन्यू नहीं करेगी। उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1701 का सीधा उल्लंघन बताया। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने साफ़ शब्दों में कहा कि लेबनान में तैनात उनके सैनिकों को छुआ नहीं जाना चाहिए।
रक्षा समझौते की जानकारी और इसराइल का जवाब
यह रक्षा समझौता साल 2006 में मंजूर हुआ था, जो 2003 के एक समझौते (MOU) पर आधारित था। यह समझौता हर पांच साल में अपने आप रिन्यू हो जाता था और इसकी अगली तारीख 13 अप्रैल 2026 थी। रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने इस फैसले की जानकारी इसराइल को दे दी है।
दूसरी तरफ, इसराइल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओरेन मार्मोरस्टीन ने इस फैसले को छोटा बताया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक पुराना समझौता था जिसमें कोई खास बात नहीं थी, इसलिए इससे इसराइल की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, इसराइल के विपक्षी नेता यायर लापिड ने अपनी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह सहयोगी देशों के साथ रिश्ते बनाए रखने में नाकाम रहे हैं।
