जेनेवा में हुई ITU काउंसिल की बैठक में UAE ने एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल की है. UAE के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास हुआ है जिसमें नागरिक टेलीकम्यूनिकेशन और ICT इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईरान द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की गई है. इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति से अपनाया गया है जो क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

ITU काउंसिल ने क्या बड़ा फैसला लिया है?

1 मई 2026 को जेनेवा में ITU काउंसिल ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया. यह पहला मौका है जब ITU ने नागरिक संचार सेवाओं और ICT ढांचे पर हमलों की स्पष्ट रूप से निंदा की है. इस प्रस्ताव को UAE ने GCC देशों और जॉर्डन की तरफ से पेश किया था. इस फैसले के तहत अब ऐसे हमलों की निगरानी, उनका आकलन और रिपोर्ट तैयार की जाएगी ताकि क्षेत्रीय और वैश्विक कनेक्टिविटी को सुरक्षित रखा जा सके.

आम लोगों और सेवाओं पर इन हमलों का क्या असर होता है?

UAE के प्रतिनिधि Jamal Al Musharakh ने बताया कि ईरान के इन हमलों ने नागरिक टेलीकम्यूनिकेशन सेवाओं को निशाना बनाया. इसका सीधा असर आम जनता की सुविधाओं पर पड़ता है. जब संचार नेटवर्क ठप होता है तो सरकारी सेवाएं, इमरजेंसी कॉल, मानवीय सहायता और आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हो जाती हैं. इससे न केवल देश के अंदर बल्कि अंतरराष्ट्रीय संपर्क भी टूट जाता है जिससे आम आदमी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

ईरान और अन्य अधिकारियों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?

ईरान के सूचना और संचार प्रौद्योगिकी मंत्री Sattar Hashemi ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि ITU को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों की निंदा करनी चाहिए. वहीं, ITU काउंसिल के अध्यक्ष Bosun Tijani ने कहा कि ITU एक तकनीकी संस्था है और इसे राजनीतिक विवादों से दूर रहना चाहिए. दूसरी ओर, UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार Dr. Anwar Gargash ने कहा कि ईरान के आक्रामक व्यवहार के बाद उसकी किसी भी एकतरफा व्यवस्था पर भरोसा नहीं किया जा सकता और अंतरराष्ट्रीय कानून ही सुरक्षा की गारंटी हैं.

Frequently Asked Questions (FAQs)

ITU काउंसिल का यह प्रस्ताव क्यों खास है?

यह ITU के इतिहास का पहला ऐसा प्रस्ताव है जो नागरिक टेलीकम्यूनिकेशन और ICT बुनियादी ढांचे पर हमलों की सीधे तौर पर निंदा करता है और इसे सभी सदस्यों की सहमति से पास किया गया है.

इस पहल में UAE के साथ और कौन से देश शामिल थे?

इस कूटनीतिक पहल का नेतृत्व UAE ने किया था और इसमें GCC के सभी सदस्य देशों और जॉर्डन ने सह-प्रायोजक के तौर पर समर्थन दिया था.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.