भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद और वहां के मौजूदा हालात पर अपने विचार साझा किए। इसके साथ ही दोनों देशों के आपसी संबंधों को लेकर भी चर्चा की गई। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। इसका सीधा असर वहां रहने वाले आम लोगों और व्यापार पर पड़ सकता है।

फोन कॉल में किन अहम बातों पर हुई चर्चा?

जयशंकर और लावरोव ने पश्चिम एशिया में 28 फरवरी के बाद से बिगड़े हालात पर अपनी राय रखी। दोनों नेताओं ने कूटनीतिक कोशिशों की समीक्षा की ताकि इलाके में शांति वापस आ सके। बातचीत के दौरान कुछ मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दिया गया:

  • पश्चिम एशिया के मौजूदा विवाद और शांति बहाल करने के प्रयास
  • भारत और रूस के बीच आपसी सहयोग और द्विपक्षीय एजेंडा
  • Strait of Hormuz में आ रही दिक्कतों और तेल सप्लाई पर चर्चा

अमेरिका ने हाल ही में भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है। इस नियम से भारत में तेल की कमी को रोकने में मदद मिलेगी। दोनों मंत्रियों ने इस विषय पर भी स्थिति का आकलन किया और कूटनीतिक बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई।

खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों पर क्या होगा असर?

विदेश मंत्रालय (MEA) ने यह साफ किया है कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता खाड़ी देशों में काम करने वाले करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा है। मौजूदा हालात में फ्लाइट्स के रूट में बदलाव किया गया है और फिलहाल जरूरी कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए लगभग 50 उड़ानें चल रही हैं। यात्रियों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने के लिए सिविल एविएशन मंत्रालय पूरी तैयारी कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले में इंडिया फर्स्ट की नीति पर जोर दिया है। इसका मतलब है कि देश की ऊर्जा जरूरतें और विदेशों में रहने वाले भारतीयों की भलाई सबसे ऊपर है। भारत सरकार लगातार कह रही है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही इस तनाव को कम किया जा सकता है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.