अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर Jake Sullivan ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि ईरान के परमाणु प्रस्तावों को समझने में अमेरिकी दूतों से बड़ी चूक हुई थी। सुलिवन के अनुसार, वॉशिंगटन और जेनेवा में मौजूद अमेरिकी अफसरों ने ईरान के उन प्रस्तावों को ठीक से नहीं समझा जो बमबारी शुरू होने से कुछ दिन पहले दिए गए थे। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव काफी बढ़ चुका है और क्षेत्र में लगातार हमले हो रहे हैं।

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Jake Sullivan के बयान में क्या खास बातें थीं?

Jake Sullivan ने ‘The Daily Show’ पर बातचीत के दौरान बताया कि जेनेवा में ईरान ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा था जो परमाणु मुद्दे को काफी हद तक हल कर सकता था। लेकिन उस समय अमेरिकी दूतों को लगा कि उन्हें जो ऑफर दिया जा रहा है, वह समझ से बाहर है। इसके ठीक कुछ दिनों बाद ही अमेरिका ने ईरान पर बमबारी शुरू कर दी थी। सुलिवन ने स्वीकार किया कि कूटनीतिक स्तर पर यह एक बड़ी चूक थी जिसने शांति के रास्ते को बंद कर दिया।

ईरान के दूतावास ने इस पर क्या जवाब दिया?

फिनलैंड में ईरान के दूतावास ने सुलिवन के इस दावे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने साफ कहा कि यह सिर्फ गलतफहमी का मामला नहीं था। दूतावास के मुताबिक, अमेरिकी विदेश नीति पर बाहरी ताकतों का बहुत ज्यादा असर था। दूतावास ने इशारा किया कि Israel के प्रभाव की वजह से अमेरिका ने डिप्लोमैटिक रास्तों को नजरअंदाज किया और सैन्य हमले का रास्ता चुना।

इस विवाद से जुड़े मुख्य बिंदु और घटनाक्रम

इस पूरे मामले में 25 मार्च 2026 तक की ताज़ा जानकारी के अनुसार निम्नलिखित बातें सामने आई हैं:

मुख्य पात्र जारी बयान का सारांश
Jake Sullivan माना कि अमेरिकी दूत ईरान के प्रस्तावों को समझने में विफल रहे।
Iran Embassy कहा कि बाहरी ताकतों ने बातचीत के रास्ते में रुकावट पैदा की।
वर्तमान स्थिति इजरायल और अमेरिका की ईरान के साथ सैन्य कार्रवाई जारी है।
स्थान जेनेवा और वॉशिंगटन में प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी।