यमन ने रचा इतिहास, पहली बार किसी महिला को बनाया अमेरिका में राजदूत, जमीला अली रजा ने ली शपथ.
यमन ने अपने कूटनीतिक इतिहास में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को अनुभवी राजनयिक जमीला अली रजा (Jamila Ali Raja) ने अमेरिका में यमन की पहली महिला राजदूत के रूप में शपथ ली है। वाशिंगटन में इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त होने वाली वह पहली महिला बन गई हैं। यमन सरकार के इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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नई राजदूत की नियुक्ति और उनका अनुभव
जमीला अली रजा को कूटनीति के क्षेत्र में काम करने का 30 साल से भी ज्यादा का लंबा अनुभव है। उन्होंने शनिवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के अध्यक्ष रशाद अल-अलिमी के सामने अपने पद की शपथ ली। इससे पहले वाशिंगटन ने 2 अप्रैल 2026 को आधिकारिक तौर पर उनके नाम को मंजूरी दे दी थी। जमीला अली रजा पहले यमन में परामर्श और सुलह आयोग की उपाध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
सरकार ने क्या दी है नई राजदूत को जिम्मेदारी?
शपथ ग्रहण समारोह के बाद राष्ट्रपति रशाद अल-अलिमी ने नई राजदूत के लिए कुछ खास लक्ष्य तय किए हैं। उन्होंने राजदूत से कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुथी विद्रोहियों के गलत प्रचार को रोकने को अपनी प्राथमिकता बनाएं। सरकार चाहती है कि दुनिया को यमन के संघर्ष की सही तस्वीर दिखाई जाए। मिशन के मुख्य उद्देश्यों में निम्नलिखित बातें शामिल की गई हैं:
- हुथी विद्रोहियों द्वारा फैलाई जा रही गलत बातों और सूचनाओं का डटकर मुकाबला करना।
- अमेरिका द्वारा हुथियों को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित करने के फैसले का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना।
- अमेरिका से मिलने वाली फंडिंग को फिर से शुरू करवाना और आर्थिक सुधारों के लिए मदद जुटाना।
- विदेशी दाताओं के साथ भरोसा कायम करना ताकि विकास कार्यों में तेजी आए।
क्यों खाली पड़ा था वाशिंगटन में यह पद?
वाशिंगटन में यमन के राजदूत का पद पिछले साल दिसंबर के मध्य से खाली चल रहा था। इससे पहले राजदूत अब्दुल वहाब अल-हजरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से यह जगह खाली थी। कुछ रिपोर्टों में बताया गया था कि पिछला इस्तीफा वेतन और फंड से जुड़े विवादों के कारण हुआ था। अब नई नियुक्ति के साथ यमन सरकार अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करना चाहती है। यमन की नेशनल कमेटी फॉर विमेन ने इस नियुक्ति को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में यमनी महिलाओं के बढ़ते प्रभाव का सबूत है।




