हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच जापान ने बदला एनर्जी प्लान, मिडिल ईस्ट के वैकल्पिक पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स को देगा भारी समर्थन.

ईरान के साथ चल रहे तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार आ रही रुकावटों के बाद जापान की सरकार ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 26 अगस्त 2026 को सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि की कि मिडिल ईस्ट में कच्चे तेल के वैकल्पिक परिवहन रास्तों यानी पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स को वित्तीय और तकनीकी मदद दी जाएगी। इस पूरी योजना की देखरेख JOGMEC यानी जापान ऑर्गेनाइजेशन फॉर मेटल्स एंड एनर्जी सिक्योरिटी द्वारा की जाएगी, जिसका मुख्य मकसद सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को उस समुद्री रास्ते से हटकर कच्चे तेल का परिवहन बढ़ाने में मदद करना है, जो फिलहाल युद्ध के कारण प्रभावित हो रहा है।
मेटि (METI) के नए नियम और आर्थिक मदद
जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय यानी METI द्वारा 24 अगस्त 2026 को कुछ खास उपायों को मंजूरी दी गई है। इसके तहत कच्चे तेल और नेफ्था की उन शिपमेंट्स के लिए ट्रांसपोर्ट खर्च कम करने की रूपरेखा तैयार की गई है जो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर नहीं गुजरती हैं। सऊदी अरब इस समय अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को रेड सी यानी लाल सागर के बंदरगाह यानबु तक बढ़ाने की योजना पर विचार कर रहा है। इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हुए जापान ने मार्च 2026 में अपने देश के लिए तेल की एक खेप मंगाई थी। इसके अलावा, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी यानी ADNOC भी अगले साल एक नया बाईपास पाइपलाइन प्रोजेक्ट शुरू करने वाली है, जिससे तेल की सप्लाई में कोई रुकावट न आए।
जापान की वैकल्पिक रणनीति और कच्चे तेल का स्टॉक
जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने देश की ऊर्जा नीति में आए एक बड़े बदलाव का जिक्र करते हुए बताया कि जून 2026 तक देश की कुल जरूरत का 70 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल मिडिल ईस्ट के अलावा अन्य जगहों से मंगाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री ने यह भी साफ किया कि इस समय जापान के पास 254 दिन का पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है और देश की योजना 2026-27 के वित्तीय वर्ष के दौरान राष्ट्रीय रिजर्व को इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के 90 दिन के मानक पर वापस लाने की है। इसके अलावा, विदेश मंत्री Toshimitsu Motegi ने सऊदी अरब और ओमान के दौरे के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही की जरूरत पर जोर दिया है।
अमेरिका और अन्य देशों से बढ़ रहा है आयात
ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए जापान अब अमेरिका, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और सेंट्रल एशिया से तेल का आयात तेजी से बढ़ा रहा है। इसमें अमेरिका से आने वाले तेल की मात्रा में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। पेट्रोलियम एसोसिएशन ऑफ जापान के अध्यक्ष Shunichi Kito ने बताया कि देश की रिफाइनरियां मिडिल ईस्ट के तेल के विकल्प के तौर पर अमेरिकी क्रूड ऑयल को सबसे ऊपर रख रही हैं। METI ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि देश की घरेलू रिफाइनरियों के पास हल्के अमेरिकी क्रूड को पारंपरिक मिडिल ईस्ट सप्लाई के साथ मिलाने की पूरी क्षमता है, क्योंकि देश हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल पर अपनी लंबे समय से चली आ रही निर्भरता को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।