जापान और फ्रांस ने एक बड़ा फैसला लिया है जिसमें वे जलडमरूमध्य होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खुलवाने के लिए एक साथ मिलकर काम करेंगे। जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron के बीच हुई बैठक में इस बात पर सहमति बनी है। यह समझौता अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है ताकि तेल और व्यापार का रास्ता साफ हो सके। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह खबर अहम है क्योंकि इससे ऊर्जा की सप्लाई और समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ता है।

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होर्मुज संकट को लेकर क्या है नया समझौता?

1 अप्रैल 2026 को जापान और फ्रांस के शीर्ष नेताओं ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस सहयोग का ऐलान किया है। दोनों देशों का मानना है कि Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने अपनी एशिया यात्रा के दौरान टोक्यो में यह साफ किया कि डिप्लोमैटिक रास्तों से ही इस संकट को सुलझाया जा सकता है। जापान ने भी फ्रांस के साथ मिलकर इस दिशा में मजबूती से काम करने का भरोसा दिया है।

इस समझौते और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी मुख्य बातें

  • जापान की प्रधानमंत्री और फ्रांस के राष्ट्रपति ने समुद्री रास्तों पर आजादी को बहाल करने पर जोर दिया है।
  • यूरोपीय देशों जैसे जर्मनी, इटली और नीदरलैंड ने भी पहले ही इस रास्ते की सुरक्षा के लिए अपना समर्थन दिया था।
  • G7 देशों और यूरोपीय संघ ने भी साझा बयान जारी कर इस रास्ते पर लगी पाबंदियों को तुरंत हटाने की मांग की है।
  • सऊदी अरब जैसे देश रेड सी (Red Sea) के जरिए तेल निर्यात बढ़ाकर इस संकट के असर को कम करने की कोशिश में जुटे हैं।
  • जापान ने साफ किया है कि वह फिलहाल इस मामले में अपनी डिफेंस फोर्स नहीं भेजेगा बल्कि कूटनीतिक समाधान पर ध्यान देगा।
  • ईरान की ओर से होने वाले हमलों और तनाव को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

यह समझौता उस समय आया है जब दुनिया भर में तेल की कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता जताई जा रही है। Strait of Hormuz दुनिया का एक ऐसा रास्ता है जहां से सबसे ज्यादा कच्चा तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता बाधित होता है तो इसका सीधा असर खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों और अन्य प्रवासियों पर भी पड़ सकता है क्योंकि इससे महंगाई और नौकरी के बाजार पर प्रभाव पड़ता है। फिलहाल दोनों देश बातचीत के जरिए इस समस्या को हल करने के लिए तैयार दिख रहे हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com