6 जुलाई 2026 को लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) के शिपिंग डेटा के मुताबिक जापान से जुड़े 10 जहाजों ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार किया. इन जहाजों में कुल 12 मिलियन बैरल कच्चा तेल ले जाया जा रहा था. यह हलचल ऐसे समय में हुई है जब जापान इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर अपनी निर्भरता खत्म करने की तैयारी में है.
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने 11 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर ऐलान किया था कि जुलाई 2026 से जापान अपनी जरूरत का 100% कच्चा तेल हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बाहर के देशों से खरीदेगा. सरकार का यह फैसला भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए लिया गया है. इसके तहत जापान अब अमेरिका, अफ्रीका, मध्य और दक्षिण अमेरिका के साथ-साथ अन्य एशियाई देशों से तेल का आयात बढ़ाएगा. अमेरिका से तेल आयात को दस गुना से ज्यादा बढ़ाने की योजना है और मेक्सिको से तेल की पहली खेप जुलाई में पहुंचने की उम्मीद है.
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षा हालात काफी खराब रहे हैं. यह रास्ता फरवरी 2026 के आखिर से व्यावसायिक जहाजों के लिए लगभग बंद था. हालांकि, जून के मध्य में अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अस्थायी समझौते के बाद यहां ट्रैफिक में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन यह अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी नीचे है. 5 जुलाई 2026 को ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने चेतावनी दी कि सभी तेल टैंकरों को केवल उनके द्वारा मंजूर किए गए रास्तों का ही इस्तेमाल करना होगा, वरना उन्हें “बलपूर्वक जवाब” का सामना करना पड़ेगा. पश्चिमी नौसेनाओं का भी मानना है कि इस जलमार्ग के बीच में करीब 80 तैरती हुई माइन्स मौजूद हैं, जिससे खतरा बना हुआ है.
इस तनाव के बीच अमेरिका ने 22 जून 2026 को ईरान के लिए 60 दिनों की एक विशेष छूट (sanctions waiver) जारी की है, जो 21 अगस्त 2026 तक मान्य है. इस छूट के कारण ईरान ने जापान की तीन कंपनियों के साथ कच्चा तेल बेचने के लिए शुरुआती बातचीत शुरू की है. यह 2019 के बाद पहली बार होगा जब जापान ईरान से तेल खरीदेगा, लेकिन जापानी कंपनियां अभी सुरक्षा की गारंटी और प्रतिबंधों में और अधिक समय की छूट मांग रही हैं.
वहीं, ओपेक प्लस (OPEC+) ने 5 जुलाई 2026 को फैसला किया कि अगस्त महीने के लिए तेल उत्पादन कोटा में कुल 1,88,000 बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी की जाएगी. यह फैसला क्षेत्रीय स्थिरता में बढ़ते भरोसे की ओर इशारा करता है.
