रूस के राष्ट्रपति पुतिन के विवादित द्वीप दौरे से भड़का जापान, रूसी राजदूत को किया तलब.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक विवादित द्वीप के दौरे पर जापान ने बहुत कड़ा विरोध जताया है और इसी सिलसिले में रूस के राजदूत को तलब कर लिया है। जापान का कहना है कि यह दौरा उनके देश के अधिकारों के खिलाफ है और इस मामले में मॉस्को के सामने पूरी सख्ती के साथ औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई गई है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से कुछ खास द्वीपों को लेकर आपसी विवाद चल रहा है, जो आज भी पूरी तरह से सुलझ नहीं पाया है।
जापान ने कड़े शब्दों में दर्ज कराई अपनी आपत्ति
तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू के मुताबिक, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने गुरुवार को रूसी राजदूत निकोले नोज़ड्रेव को अपने विदेश मंत्रालय में बुलाया और उनके सामने अपनी बात रखी। जापानी विदेश मंत्री ने साफ कहा कि रूस को इस मामले में जापान की आपत्ति से जल्द से जल्द अवगत कराया जाए। टोक्यो प्रशासन का साफ मानना है कि इटुरुप समेत दक्षिणी कुरील द्वीप समूह के कुल चार द्वीप उनके अपने क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा हैं और जापान इन सभी को ‘नॉर्दर्न टेरिटरीज’ यानी उत्तरी क्षेत्र के रूप में मानता है।
पुतिन का पहला व्यक्तिगत दौरा
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र सखालिन के दौरे के दौरान इटुरुप द्वीप का भी दौरा किया। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, इन विवादित द्वीपों के समूह पर पुतिन का यह अब तक का पहला व्यक्तिगत दौरा बताया जा रहा है। अपने इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने सखालिन के गवर्नर वालेरी लिमारेंको के साथ मिलकर एक मछली प्रसंस्करण परिसर और वहां के स्थानीय अस्पताल का बारीकी से निरीक्षण किया। इसके अलावा उन्होंने एक स्कूल का भी दौरा किया और बाद में गवर्नर के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की।
द्वितीय विश्वयुद्ध के समय से चला आ रहा है विवाद
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इटुरुप पूरी तरह से इस समय रूस के नियंत्रण में आता है और यह जापान के उत्तरी द्वीप होक्काइडो के ठीक उत्तर में स्थित है। रूस इन सभी विवादित द्वीपों को दक्षिणी कुरील का ही एक मुख्य हिस्सा मानता है। जापान और रूस के बीच मुख्य रूप से इटुरुप, कुनाशिरी, शिकोटान और हबोमाई इन चारों द्वीपों को लेकर लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद बना हुआ है। टोक्यो का यह बड़ा आरोप है कि सोवियत संघ ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बिल्कुल अंतिम दिनों में जापान के आत्मसमर्पण करने के तुरंत बाद इन सभी द्वीपों पर जबरन कब्जा जमा लिया था। वहीं दूसरी तरफ रूस का हमेशा से यही कहना रहा है कि इन सभी द्वीपों पर उनका नियंत्रण पूरी तरह से वैध और सही है।
शांति संधि में आ रही है बड़ी रुकावट
यह पुराना क्षेत्रीय विवाद द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही दोनों देशों के बीच कोई भी औपचारिक शांति संधि होने की राह में एक बहुत बड़ी बाधा बना हुआ है। इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जापान सरकार द्वारा मॉस्को के ऊपर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे, जिसके बाद से दोनों देशों के आपसी संबंध पहले से कहीं ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। जापान ने पुतिन के इस ताजा इटुरुप दौरे पर जो कड़ी आपत्ति जताई है, उसके पीछे यही पुरानी पृष्ठभूमि मुख्य वजह है।
दोनों देशों के बयानों में अंतर
जापानी विदेश मंत्री मोटेगी ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि यह विवादित द्वीप पूरी तरह से जापान के क्षेत्र का एक अटूट हिस्सा हैं और इनका दर्जा हमेशा से ऐतिहासिक तथ्यों तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर ही तय किया जाता है। वहीं दूसरी तरफ, रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अपने इस दौरे से एक दिन पहले जापान के क्षेत्रीय दावे का जिक्र करते हुए कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के कार्यकाल के दौरान मॉस्को और टोक्यो के बीच संबंध काफी बेहतर थे। उन्होंने यह भी कहा कि अब दोनों देशों के रुख में काफी बदलाव आ चुका है और रूस की तरफ से इसके लिए कभी भी किसी तरह का उकसावा नहीं दिया गया। पुतिन का यह दौरा ऐसे समय में सामने आया है जब रूस अपने सुदूर पूर्वी इलाकों में सैन्य और आर्थिक गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दे रहा है, जिससे आने वाले समय में इन पुराने विवादों के फिर से तूल पकड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है।