अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने सहयोगी देशों से Hormuz Strait की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी। इस पर जापान की सत्ताधारी पार्टी LDP के पॉलिसी चीफ ताकायुकी कोबायाशी ने रविवार, 15 मार्च 2026 को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जापान के लिए वहां अपने युद्धपोत भेजना बेहद मुश्किल है और इस तरह के फैसले पर बहुत सावधानी से विचार करने की जरूरत है।

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अमेरिका की मांग और जापान का जवाब

शनिवार, 14 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापान, साउथ कोरिया, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों से कहा था कि वे Hormuz Strait में अपने युद्धपोत तैनात करें। इस समय अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध अपने तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है। ईरान के IRGC ने इस समुद्री रास्ते पर कड़ा पहरा लगा रखा है। जापान ने साफ किया है कि जब तक युद्ध पूरी तरह रुक नहीं जाता, तब तक वह वहां अपने जहाज नहीं भेजेगा। जापान की प्रधानमंत्री सनाई ताकाइची 19 मार्च को वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप से मिलकर इस मुद्दे पर आगे की बात करेंगी।

क्या है जापान का कानून और मौजूदा हालात

जापान का संविधान उसे आसानी से अपनी सेना को युद्ध क्षेत्र में भेजने की इजाजत नहीं देता है। साल 2015 के सुरक्षा कानून के तहत, सेना को तभी बाहर भेजा जा सकता है जब देश के अस्तित्व पर सीधा खतरा हो। वहां की आम जनता भी युद्ध में शामिल होने के सख्त खिलाफ है। कोबायाशी ने NHK चैनल पर कहा कि कानूनी तौर पर इसे पूरी तरह नकारा नहीं गया है, लेकिन इसके रास्ते में बहुत बड़ी रुकावटें हैं और मौजूदा स्थिति में युद्धपोत भेजना आसान नहीं है।

खाड़ी देशों के तनाव और तेल पर असर

ईरान के खार्ग आइलैंड (Kharg Island) पर अमेरिकी हमले के बाद से Hormuz Strait से तेल का व्यापार पूरी तरह प्रभावित हुआ है। इस स्थिति से निपटने के लिए जापान की सरकार ने पहले ही एक बड़ा कदम उठाया है। 11 मार्च को प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि बाजार में स्थिरता लाने के लिए जापान अपने रिजर्व से 80 मिलियन (8 करोड़) बैरल तेल निकालेगा। यह उन सभी प्रवासियों के लिए अहम जानकारी है जो खाड़ी देशों में रहते हैं, क्योंकि वहां के हालातों का सीधा असर पूरी दुनिया के तेल व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.