जापान की RIKEN सेंटर और टोक्यो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी प्लास्टिक तैयार की है जो पर्यावरण के लिए वरदान साबित हो सकती है। यह खास प्लास्टिक समुद्र के पानी में जाते ही कुछ घंटों में घुल जाती है और फिर मिट्टी में मिलकर खाद का काम करती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके इस्तेमाल से माइक्रोप्लास्टिक्स जैसा कोई कचरा पीछे नहीं बचता, जो समुद्री जीव-जंतुओं के लिए खतरनाक होता है।

कैसे काम करती है यह प्लास्टिक

इस नई तकनीक को सुप्रामोल्यूलर पॉलिमर्स से तैयार किया गया है। इसकी बनावट ऐसी है कि यह इस्तेमाल के दौरान तो मजबूत रहती है, लेकिन खारे पानी के संपर्क में आते ही इसके बंधन टूट जाते हैं। यह प्लास्टिक मिट्टी में 10 दिनों के अंदर पूरी तरह से खत्म हो जाती है और इसमें मौजूद नाइट्रोजन और फॉस्फोरस मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद करते हैं।

भविष्य में होंगे ये बड़े बदलाव

रिसर्च टीम के सदस्य Takuzo Aida के मुताबिक, यह प्लास्टिक लचीली होने के साथ-साथ बेहद मजबूत भी है। इस तकनीक का इस्तेमाल खेती में इस्तेमाल होने वाली मल्च फिल्मों, पैकेजिंग और समुद्र में मछुआरों द्वारा छोड़े गए घोस्ट नेट्स (जाल) की समस्या को खत्म करने में किया जा सकेगा। अभी यह तकनीक लैब स्तर पर है और बड़े पैमाने पर बाजार में आने के लिए इसे और अधिक टेस्टिंग और निवेश की जरूरत है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.