Strait of Hormuz में तनाव बहुत बढ़ गया है और अमेरिका ने यहाँ नाकाबंदी का ऐलान किया है. इस बीच जापान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सेना (SDF) को यहाँ भेजने के बारे में अभी कोई फैसला नहीं लिया है. जापान के लिए यह समुद्री रास्ता बहुत ज़रूरी है क्योंकि उसका 80% तेल यहीं से आता है, इसलिए वह बहुत सावधानी से कदम उठा रहा है.

जापान ने अभी तक सेना क्यों नहीं भेजी?

जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव Minoru Kihara ने सोमवार को बताया कि उनकी पहली प्राथमिकता इलाके में शांति बनाए रखना है. टोक्यो चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कोई रुकावट न आए और जहाजों का आना-जाना सुरक्षित रहे. जापान के संविधान के नियम भी विदेशी जमीन पर सेना भेजने में पाबंदियां लगाते हैं, इसलिए सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती.

तारीख मुख्य घटना
12 अप्रैल 2026 डोनाल्ड ट्रंप ने Strait of Hormuz की नाकाबंदी का ऐलान किया
13 अप्रैल 2026 जापान ने सेना भेजने पर कोई फैसला नहीं लेने की बात कही
13 अप्रैल 2026 CENTCOM ने नाकाबंदी लागू करने का समय तय किया
22 मार्च 2026 विदेश मंत्री ने कहा कि युद्धविराम होने पर ही सेना भेजी जा सकती है
23 मार्च 2026 जापान ने अमेरिकी राजदूत के दावों को नकारा कि उन्होंने मदद का वादा किया था

अमेरिका और ईरान के बीच क्या विवाद है?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वे इस रास्ते की नाकाबंदी करेंगे. उन्होंने ईरान पर समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने का आरोप लगाया है और इसे दुनिया के साथ धोखा बताया है. अमेरिका की Central Command (CENTCOM) ने कहा कि यह नाकाबंदी सोमवार रात 11 बजे से शुरू होगी, लेकिन यह केवल ईरानी बंदरगाहों की तरफ जाने वाले जहाजों के लिए होगी.

जापान के लिए यह मामला कितना गंभीर है?

जापान अपनी तेल जरूरतों के लिए पूरी तरह से इस समुद्री रास्ते पर निर्भर है. हालांकि जापान के पास 250 दिनों का तेल रिजर्व है, फिर भी व्यापार ठप होने का डर बना हुआ है. जापान के विदेश मंत्री Toshimitsu Motegi ने पहले संकेत दिया था कि अगर अमेरिका, ईरान और इसराइल के बीच पूरी तरह से युद्धविराम हो जाता है, तभी सेना भेजने पर विचार किया जाएगा.