जापान ने 16 मार्च 2026 से अपने रणनीतिक तेल भंडार (strategic oil reserves) को बाजार में जारी करना शुरू कर दिया है। यह कदम ईरान पर चल रहे अमेरिका और इजराइल के सैन्य हमलों के कारण लिया गया है। इस युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद हो गया है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है। जापान सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को रोकने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है।

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जापान ने क्यों लिया यह फैसला और आम जनता पर क्या होगा असर

जापान में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल के दाम तेजी से बढ़ रहे थे। एक सर्वे के अनुसार, 9 मार्च को राष्ट्रीय औसत कीमत 161.8 येन प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। विशेषज्ञों का मानना था कि अगर सरकार दखल नहीं देती, तो कीमतें 20 येन और बढ़ सकती थीं।

सरकार का मुख्य लक्ष्य औसत गैसोलीन की कीमत को 170 येन (लगभग 1.07 डॉलर) प्रति लीटर के आसपास स्थिर रखना है। इस योजना के तहत जापान लगभग 80 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारेगा, जो उसके कुल भंडार का करीब 20 प्रतिशत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रही हैं, जिसे देखते हुए यह राहत भरा कदम जरूरी था।

जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के औपचारिक फैसले का इंतजार किए बिना जापान ने तेल के दाम कंट्रोल करने के लिए खुद पहल करने का निर्णय लिया है।

कैसे जारी होगा तेल और क्या हैं नए नियम

इस योजना को कुल 45 दिनों के लिए लागू किया गया है। शुरुआत के 15 दिनों में प्राइवेट सेक्टर के रिजर्व का इस्तेमाल किया जाएगा और उसके बाद के 30 दिनों में सरकार अपने राष्ट्रीय भंडार से तेल देगी।

  • प्राइवेट रिफाइनरी के लिए नियम: अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (METI) ने जापान की टॉप 4 रिफाइनरियों को निर्देश दिया है। अब वे अपने कच्चे तेल के भंडार को 70 दिनों की बजाय 55 दिनों तक कम कर सकते हैं।
  • एक्सपोर्ट पर रोक: रिफाइनरियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे घरेलू खपत को पहले प्राथमिकता दें और बचे हुए फ्यूल का एक्सपोर्ट न करें।
  • नए विकल्पों की तलाश: मंत्री Ryusei Akazawa ने बताया कि जापान अब अमेरिका, मध्य एशिया और दक्षिण अमेरिका से कच्चा तेल मंगाने की कोशिश कर रहा है ताकि होर्मुज के रास्ते पर निर्भरता कम की जा सके।

रक्षा मंत्री Shinjiro Koizumi ने भी अमेरिकी रक्षा सचिव से ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा की है, हालांकि जापान अभी उस रास्ते पर अपने नौसेना के जहाज भेजने की कोई योजना नहीं बना रहा है।