रूस के राष्ट्रपति पुतिन के इटुरुप द्वीप के दौरे से भड़का जापान, रूसी राजदूत को विदेश मंत्रालय में किया तलब.

Nura Basta13 August 20264 min read66 viewsWorld
रूस के राष्ट्रपति पुतिन के इटुरुप द्वीप के दौरे से भड़का जापान, रूसी राजदूत को विदेश मंत्रालय में किया तलब.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विवादित इटुरुप द्वीप के दौरे पर जापान ने कड़ा विरोध जताया है और मामले को लेकर रूस के राजदूत को तलब किया है। जापान सरकार ने साफ कर दिया है कि इस तरह के दौरों से दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहा क्षेत्रीय विवाद और ज्यादा गहरा सकता है। यह पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही इन द्वीपों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है और अब तक कोई औपचारिक शांति संधि नहीं हो पाई है।

जापान ने रूसी राजदूत को किया तलब

जापान ने गुरुवार को रूस के राजदूत निकोले नोज़ड्रेव को विदेश मंत्रालय में बुलाया और मॉस्को के सामने अपना औपचारिक विरोध दर्ज कराया। तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू के अनुसार, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने रूसी राजदूत से साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में रूस को जापान की आपत्ति से जल्द से जल्द अवगत कराया जाए। टोक्यो इटुरुप समेत दक्षिणी कुरील द्वीप समूह के चार द्वीपों पर अपना अधिकार जताता है और इन सभी को अपने ‘नॉर्दर्न टेरिटरीज’ यानी उत्तरी क्षेत्र के रूप में मानता है। जापानी विदेश मंत्री का कहना है कि यह विवादित द्वीप जापान के क्षेत्र का एक अभिन्न हिस्सा हैं और इनका दर्जा हमेशा ऐतिहासिक तथ्यों तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर ही तय होता है.

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पुतिन का इटुरुप द्वीप का पहला व्यक्तिगत दौरा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र सखालिन के दौरे के दौरान इटुरुप द्वीप का अचानक दौरा किया। यह क्षेत्र कुरील द्वीप समूह के चार विवादित दक्षिणी द्वीपों में पूरी तरह शामिल है। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, इन द्वीपों के पूरे समूह पर राष्ट्रपति पुतिन का यह पहला व्यक्तिगत दौरा है जो अपने आप में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अपने इस विशेष दौरे के दौरान पुतिन ने सखालिन के गवर्नर वालेरी लिमारेंको के साथ मिलकर एक मछली प्रसंस्करण परिसर और स्थानीय अस्पताल का बारीकी से निरीक्षण किया। इसके अलावा उन्होंने एक स्कूल का भी दौरा किया और वहां की व्यवस्थाओं को देखा तथा बाद में गवर्नर के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की।

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय से चला आ रहा है विवाद

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इटुरुप वर्तमान में पूरी तरह से रूस के नियंत्रण में है और यह जापान के उत्तरी द्वीप होक्काइडो के ठीक उत्तर में स्थित है। रूस इन सभी द्वीपों को दक्षिणी कुरील का ही एक मुख्य हिस्सा मानता है। जापान और रूस के बीच इटुरुप के अलावा कुनाशिरी, शिकोटान और हबोमाई द्वीपों को लेकर लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद चला आ रहा है। टोक्यो का यह बड़ा आरोप है कि सोवियत संघ ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बिल्कुल अंतिम दिनों में जापान के आत्मसमर्पण करने के ठीक तुरंत बाद इन सभी द्वीपों पर जबरन कब्जा कर लिया था। वहीं दूसरी तरफ रूस का हमेशा से यही कहना रहा है कि इन सभी द्वीपों पर उसका नियंत्रण पूरी तरह से वैध और सही है। यही पुराना क्षेत्रीय विवाद द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की औपचारिक शांति संधि होने की राह में हमेशा से एक बहुत बड़ी बाधा बना रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद और बढ़ा तनाव

रूस और यूक्रेन के बीच हुए युद्ध के बाद जापान ने मॉस्को पर कई तरह के कड़े प्रतिबंध लगाए थे जिसके चलते दोनों देशों के आपसी संबंध पहले से कहीं ज्यादा तनावपूर्ण हो चुके हैं। जापान ने पुतिन के इस इटुरुप दौरे पर भी ठीक इसी पृष्ठभूमि में अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। एक दिन पहले अपने सखालिन दौरे के दौरान पुतिन ने जापान के क्षेत्रीय दावे का जिक्र करते हुए कहा था कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के कार्यकाल के दौरान मॉस्को और टोक्यो के संबंध काफी बेहतर हुआ करते थे। लेकिन अब दोनों देशों के रुख में काफी बदलाव आ चुका है और रूस की तरफ से इसके लिए किसी भी तरह से उकसाया नहीं गया है। पुतिन का यह हालिया दौरा ऐसे समय में सामने आया है जब रूस अपने सुदूर पूर्वी हिस्से में सैन्य और आर्थिक गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दे रहा है, जिससे आने वाले समय में जापान और रूस के बीच पुराने क्षेत्रीय विवाद के एक बार फिर से सुर्खियों में आने की पूरी आशंका बन गई है.

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