जापान सरकार ने Strait of Hormuz में समुद्री सुरंगों यानी माइंस को हटाने के लिए अपनी सेना भेजने की संभावना जताई है। जापानी विदेश मंत्री Toshimitsu Motegi ने 22 मार्च 2026 को कहा कि अगर ईरान और अमेरिका-इजराइल संघर्ष में पूरी तरह सीजफायर हो जाता है, तो जापान माइंस हटाने पर विचार करेगा। यह कदम खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा सकता है। फिलहाल तनाव के कारण यह समुद्री रास्ता काफी हद तक बंद है जिससे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है।

जापानी सेना के मिशन को लेकर क्या हैं जरूरी शर्तें?

  • जापान के संविधान के मुताबिक उसकी सेना यानी Self-Defense Forces (SDF) युद्ध के दौरान किसी दूसरे देश के क्षेत्र में ऑपरेशन नहीं कर सकती।
  • प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने स्पष्ट किया है कि जब तक संघर्ष जारी है, जापान अपने माइंसवीपर जहाज वहां नहीं भेजेगा।
  • सीजफायर होने के बाद छोड़ी गई समुद्री सुरंगों को हटाना संवैधानिक रूप से संभव है क्योंकि इसे युद्ध की कार्रवाई नहीं माना जाता।
  • जापान के साथ-साथ ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने भी ईरान द्वारा माइंस बिछाने की कार्रवाई की निंदा की है और सुरक्षा में सहयोग की बात कही है।
  • यह फैसला तब लिया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने सहयोगियों से समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने में मदद मांगी है।

मौजूदा स्थिति और जापान का अगला कदम

जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री रास्ते पर काफी हद तक निर्भर रहता है। अगर Strait of Hormuz सुरक्षित नहीं होता है, तो इससे दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं जिसका सीधा असर प्रवासियों पर भी पड़ता है। वर्तमान स्थिति को नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:

प्रमुख अधिकारी आधिकारिक बयान और जानकारी
Toshimitsu Motegi सीजफायर के बाद सेना भेजने और माइंस हटाने पर विचार किया जाएगा
Sanae Takaichi संविधान के आर्टिकल 9 के तहत युद्ध के दौरान सेना भेजना संभव नहीं है
जापान सरकार फिलहाल जहाजों को तुरंत निकालने की कोई नई व्यवस्था नहीं है
ईरानी विदेश मंत्रालय ईरान का दावा है कि रास्ता सिर्फ दुश्मन देशों के लिए बंद है

जापान की समुद्री सेना माइंस हटाने के काम में बहुत एक्सपर्ट मानी जाती है। सरकार का कहना है कि वे सिर्फ जानकारी जुटाने और जहाजों को सुरक्षा देने के लिए अपने जहाजों का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए वे अन्य देशों की सेनाओं को रसद और अन्य मदद भी दे सकते हैं। फिलहाल जापान पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी फैसले से पहले अपने सुरक्षा सहयोगियों से चर्चा कर रहा है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.