ओमान पहुंचे जापान के विदेश मंत्री, मस्कट में सुरक्षा और ऊर्जा सप्लाई को लेकर होगी अहम बैठक

जापान के विदेश मंत्री Toshimitsu Motegi अपनी उच्च स्तरीय कूटनीतिक यात्रा के तहत गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को ओमान की राजधानी मस्कट पहुंच गए हैं। यह दौरा 17 अगस्त से 22 अगस्त के बीच तय किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और जापान के लिए ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना है। ओमान पहुंचने पर मंत्री Motegi ने ओमान के विदेश मंत्री Sayyid Badr bin Hamad al Busaidi के साथ बैठक की रूपरेखा तैयार की, जिसमें दोनों देशों के आपसी हितों पर खुलकर चर्चा की गई।
समुद्री सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा
इस बैठक का सबसे मुख्य एजेंडा होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य रखना है। जापान के विदेश मंत्री ओमान के अधिकारियों से यह अपील करने वाले हैं कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य शिपिंग गतिविधियों को जारी रखें और इस दौरान किसी भी तरह का अतिरिक्त ट्रांजिट शुल्क न वसूला जाए। आपको बता दें कि इस जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर ओमान और ईरान के बीच पहले से ही बातचीत चल रही है, जिसके चलते जापान इस मामले में अपनी स्थिति साफ करना चाहता है.
ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता
ओमान को कच्चे तेल और एलएनजी यानी कि LNG यानी द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का एक बहुत बड़ा और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता माना जाता है। जापानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंत्री Motegi इस यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग को और अधिक मजबूत करने के साथ-साथ मध्य पूर्व के सुरक्षा हालात पर भी खुली बातचीत कर रहे हैं। इस कूटनीतिक दौरे का मकसद क्षेत्रीय संघर्षों को जल्द से जल्द शांत करना और फारस की खाड़ी के उन देशों में पुनर्निर्माण कार्य में सहयोग का आकलन करना है, जिन्हें हाल ही में ईरान के हमलों की वजह से बुनियादी ढांचे का नुकसान उठाना पड़ा था।
सऊदी अरब का दौरा और यमन के हालात पर चर्चा
ओमान आने से पहले जापानी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब का दौरा किया था। वहां उन्होंने यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष Rashad Mohammed Al-Alimi से मुलाकात की थी। अपनी उस यात्रा के दौरान उन्होंने होती विद्रोहियों द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की और यमन की सरकार को जापान की तरफ से पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को लेकर भी अपनी गहरी चिंता जताई और इस संकट को सुलझाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया।