यरूशलेम के पुराने शहर में 14 मई 2026 को भारी तनाव देखा गया। यहाँ आयोजित ‘फ्लैग मार्च’ के दौरान कट्टरपंथी इसराइलियों ने फिलिस्तीनियों पर हमला किया और नस्ली नारेबाजी की। इस घटना के बाद इलाके में डर का माहौल बन गया और कई दुकानें बंद रहीं।

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फ्लैग मार्च के दौरान क्या हुआ और क्यों हुई हिंसा?

14 मई को यरूशलेम दिवस मनाने के लिए हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। इस मार्च के दौरान कुछ कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों ने “डेथ टू अरब्स” और “मुहम्मद मर चुका है” जैसे भड़काऊ नारे लगाए। हिंसा इतनी बढ़ गई कि ईसाई क्वार्टर में भी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया। शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहे ‘Standing Together’ संगठन के यहूदी और फिलिस्तीनी कार्यकर्ताओं पर भी हमले हुए।

सरकारी अधिकारियों और पुलिस ने क्या कदम उठाए?

शहर में शांति बनाए रखने के लिए हज़ारों की संख्या में पुलिस और बॉर्डर पुलिस तैनात की गई थी। पुलिस ने अलग-अलग हिंसक घटनाओं के सिलसिले में कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें यहूदी और फिलिस्तीनी दोनों शामिल थे। वहीं, नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर Itamar Ben Gvir ने टेम्पल माउंट का दौरा किया और वहाँ इसराइली झंडा फहराकर दावा किया कि यह जगह अब उनके नियंत्रण में है।

फिलिस्तीनियों और अन्य संगठनों की क्या प्रतिक्रिया रही?

फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इस मार्च को उकसाने वाला और आक्रामक बताया। उन्होंने इसे यरूशलेम के यहूदीकरण की कोशिश कहा। सुरक्षा के डर से मुस्लिम क्वार्टर के दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। विपक्षी नेता Ofer Cassif ने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

Frequently Asked Questions (FAQs)

फ्लैग मार्च कब और कहाँ हुआ?

यह मार्च 14 मई 2026 को पूर्वी यरूशलेम के पुराने शहर में हुआ, जो यरूशलेम दिवस के मौके पर आयोजित किया गया था।

इस घटना में कितने लोग गिरफ्तार हुए?

इसराइली पुलिस ने अलग-अलग हिंसक घटनाओं के सिलसिले में कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया है।