Jharkhand में बड़ा फैसला, छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार ने रद्द की 44 भर्तियां.

झारखंड में पिछले काफी दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने छात्रों की नाराजगी और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए कुल 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य के युवाओं और छात्र संगठनों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि वे लंबे समय से इन परीक्षाओं में गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर आवाज उठा रहे थे। सरकार के इस कदम से स्पष्ट होता है कि प्रशासन अब युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर रुख अपना रहा है।
छात्रों का 26 दिनों का लंबा आंदोलन और राहुल गांधी की भूमिका
झारखंड में यह पूरा विवाद तब गरमाया जब विभिन्न छात्र संगठनों, खासकर JPSC-JSSC Reform Manch के नेतृत्व में छात्रों ने लगातार 26 दिनों तक जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कई छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे थे, जिनमें रविंद्र पासवान, रूपेश कुमार पाल, सविता कुमारी और राहुल क्रांति जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। प्रदर्शन के 15 दिन की भूख हड़ताल के बाद छात्र नेता रविंद्र पासवान ने आगामी दो महीने के लिए विरोध प्रदर्शन को रोकने की घोषणा की।
राज्य के मंत्री इरफान अंसारी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि सरकार हमेशा युवाओं के साथ खड़ी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस पूरे फैसले के पीछे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एक अहम भूमिका रही है, जिनके सुझावों के बाद प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News पर जा सकते हैं।
कौन-कौन सी परीक्षाएं हुईं रद्द और क्या है TSR Data Processing का मामला
सरकार द्वारा रद्द की गई परीक्षाओं में मुख्य रूप से 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षाएं और JSSC-CGL जैसी बड़ी परीक्षाएं शामिल हैं। इसके अलावा सरकार ने 6 परीक्षाओं को फिलहाल रोक दिया है और 17 अन्य परीक्षाओं की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी CID को सौंप दी है।
इन सभी परीक्षाओं को संचालित करने वाली मुख्य एजेंसी TSR Data Processing Private Limited थी, जिसे साल 2014 से ही कथित अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था। इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट आप News On Air की वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं।
नई समिति का गठन और सीबीआई जांच की मांग खारिज
जहां एक तरफ छात्र नेता देवेंद्र नाथ माhto ने इन परीक्षाओं के रद्द होने को एक ऐतिहासिक जीत बताया है, वहीं दूसरी तरफ स्थिति अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई है। जिन उम्मीदवारों ने पहले ही पुरानी परीक्षाओं को पास कर लिया था, उन्होंने अपनी नियुक्तियां रद्द किए जाने के विरोध में बुधवार को झारखंड सचिवालय का घेराव किया।
इस पूरी व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया है, जो अगले दो महीनों के भीतर परीक्षा सुधारों का नया खाका तैयार करेगी। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि वह हाईकोर्ट से इन मामलों की सुनवाई के लिए एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन का अनुरोध करेगी। हालांकि, राज्य की मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने छात्रों द्वारा की जा रही सीबीआई जांच की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है, और इसे अनुचित बताते हुए राज्य स्तर पर ही निष्पक्ष जांच कराने की बात कही है।