Jharkhand के Bokaro जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहाँ एक 83 साल के बुजुर्ग को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वे पूरी तरह जीवित हैं. इस प्रशासनिक गलती की वजह से उनकी पेंशन बंद हो गई और अब बुजुर्ग और उनका परिवार मदद के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है.
क्या है धरणीधर मांझी का मामला
बोकारो जिले के रहने वाले 83 वर्षीय धरणीधर मांझी को सरकारी रिकॉर्ड में गलती से मृत मान लिया गया. पेंशन सत्यापन की प्रक्रिया के बाद उनकी पेंशन रोक दी गई. जब परिवार ने इसकी जांच की तो पता चला कि सरकारी कागजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है. इस वजह से परिवार को काफी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या कदम उठाए
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री Hemant Soren ने तुरंत जांच के निर्देश दिए हैं. उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया है कि इस गलती को जल्द सुधारा जाए. मुख्यमंत्री ने पीड़ित व्यक्ति और उनके परिवार को भरोसा दिलाया है कि उन्हें पूरा सहयोग मिलेगा और उनकी रुकी हुई पेंशन दोबारा शुरू की जाएगी.
लापता कर्मचारियों के लिए पेंशन नियमों में बदलाव
इस बीच केंद्र सरकार ने लापता सरकारी कर्मचारियों के परिवारों के लिए पेंशन नियमों में बड़ी ढील दी है. पहले परिवार को पेंशन के लिए 7 साल तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब लापता होने के तुरंत बाद आवेदन किया जा सकता है. यह नया नियम खासतौर पर जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और नक्सलवाद प्रभावित इलाकों में तैनात कर्मचारियों के परिजनों के लिए राहत लेकर आया है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
धरणीधर मांझी के साथ क्या हुआ था
झारखंड के बोकारो जिले के 83 वर्षीय धरणीधर मांझी को सरकारी रिकॉर्ड में गलती से मृत घोषित कर दिया गया, जिससे उनकी पेंशन बंद हो गई.
लापता सरकारी कर्मचारियों के पेंशन नियम में क्या बदलाव हुआ है
अब लापता कर्मचारियों के परिवार को पेंशन के लिए 7 साल इंतजार नहीं करना होगा, वे लापता होने के तुरंत बाद आवेदन कर सकेंगे.