झारखंड के गिरिडीह जिले के तिरला पंचायत के रहने वाले 40 वर्षीय लालचंद महतो की दुबई में दुखद मौत हो गई। वह जनवरी 2026 में बेहतर भविष्य की तलाश में दुबई गए थे, लेकिन करीब दो महीने बाद ही उनके पास से पासपोर्ट और वीजा गायब हो गए, जिससे उनकी नौकरी चली गई। इसके बाद उन्हें गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट का सामना करना पड़ा और वे अन्य प्रवासियों की मदद पर निर्भर रहने को मजबूर थे।
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प्रशासन और नेताओं ने की पहल
दुबई पुलिस ने पिछले रविवार को एक शव बरामद किया, जिसे व्यक्तिगत सामानों के आधार पर लालचंद महतो के रूप में पहचाना गया है। इस घटना के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, क्योंकि लालचंद अपने परिवार का एकमात्र सहारा थे। उनके पिता दशरथ महतो भी 2013 से मुंबई से लापता हैं।
झारखंड के स्टेट माइग्रेंट कंट्रोल सेल की प्रमुख शिखा लाकड़ा ने इस मामले में दुबई स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क साधा है। वहीं, स्थानीय विधायक नगेंद्र महतो ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर शव को जल्द भारत लाने और कंपनी के खिलाफ जांच करने की मांग की है। इसके अलावा, डुमरी के विधायक जयराम महतो ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की और दूतावास के अधिकारियों से बातचीत कर शव को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करवाई है।
